दुबौलिया। माझा क्षेत्र के किसान हर साल बाढ़ का पानी उतरने के बाद ट्रैक्टरों को सरयू नदी पार ले जाने का जोखिम उठा रहे हैं। गेहूं की बुआई के समय यह चुनौती और बढ़ गई है। किसान बताते हैं कि पुल नहीं होने से यह काम न केवल श्रम साध्य है, बल्कि साहस और धैर्य का भी इम्तिहान लेता है।
स्थानीय किसानों के अनुसार, उसियार घाट से बड़ी नाव मंगाकर ट्रैक्टरों को चांदपुर घाट तक ले जाना आसान नहीं है। नाव में चार-चार ट्रैक्टर लादकर पार करना कई घंटे की मेहनत और सतर्कता का काम है। कई बार तेज बहाव या नाव में संतुलन बिगड़ने से ट्रैक्टर गिरने का भी खतरा रहता है। इसके बावजूद किसान अपने खेतों की जुताई और फसल की सुरक्षा के लिए यह जोखिम उठाते हैं।
किसान वर्षों से चांदपुर घाट पर पीपे का पुल बनाने की मांग करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि पुल बन जाने से ट्रैक्टर और कृषि संसाधनों का आवागमन काफी आसान हो जाएगा और किसानों को हर साल जान जोखिम में डालने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। माझा क्षेत्र में हजारों बीघा में गेहूं की बुआई होती है, और बिना सुरक्षित परिवहन के खेतों की जुताई और फसल की देखभाल मुश्किल हो जाती है।
हाल ही में किसानों ने बड़ी नाव में चार ट्रैक्टर लादकर माझा क्षेत्र में जुताई के लिए पार कर दिया। इस काम में उनकी मेहनत और लगन की प्रशंसा पूरे क्षेत्र में हो रही है। उस्मान, राघवराम, आदित्य आदि कई गांवों के किसान उम्मीद जताते हैं कि प्रशासन जल्द ही चांदपुर घाट पर पीपे का पुल बनवाएगा। इससे सिर्फ खेती-किसानी ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा के आवागमन में भी काफी सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि पुल बन जाने से न केवल उनकी मेहनत कम होगी, बल्कि जोखिम भी घटेगा और क्षेत्र में कृषि गतिविधियों में बढ़ोतरी होगी।ल
खतरे के बीच हिम्मत का सफर- संवाद