परिषदीय विद्यालयों के 82 फीसदी बच्चों का बन चुका अपार
जिले में कक्षा एक से 12 तक के 418292 छात्र-छात्राएं पंजीकृत
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जनपद में अपार (परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्र) बनाने की रफ्तार धीमी है। अब तक 53 फीसदी छात्र-छात्राओं का अपार आईडी बन सका है। इसके पीछे छात्र-छात्राओं का दो जगह नामांकन होना बड़ी बाधा है। इसके अलावा आधार कार्ड बनने की धीमी गति के कारण भी अपार में देरी हो रहा है। अब तक जनपद में 53 प्रतिशत अपार बनाया गया है।
कक्षा एक से 12 तक के पंजीकृत कुल चार लाख 18 हजार 292 छात्र-छात्राओं में से अब तक दो लाख 21 हजार 935 छात्र-छात्राओं का ही अपार बन सका है। हालांकि, इस मामले में बेसिक शिक्षा विभाग आगे है। प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल में पढ़ने वाले 82 फीसदी छात्र-छात्राओं का अपार बनवाया जा चुका है। मगर, इंटर कॉलेजों में अभी काफी सुस्ती देखी जा रही है।
पिछले दिनों बेसिक शिक्षा अधिकारी ने अपार बनाने में शिथिलता पर आठ विद्यालयों को प्रतिकूल प्रविष्टि और आठ शिक्षकों का वेतन बाधित करने के आदेश के बाद अपार में तेजी आई है। अब तक प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल में पढ़ने वाले 82 प्रतिशत बच्चों का अपार आईडी बनाया जा चुका है। जनपद में कक्षा आठ तक के 1,44,272 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इनमें से 1,19,656 विद्यार्थियों का अपार बनाया जा चुका है।
अपार डिजिटल प्लेटफार्म है, जहां विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र सुरक्षित रखा जाता है। विद्यार्थियों के दोहरा रजिस्ट्रेशन के कारण अपार बनने के प्रगति धीमी पड़ती दिख रही है। तमाम ऐसे बच्चे हैं जिन्होंने प्राइवेट और सरकारी दोनों स्कूलों में नामांकन करा रखा है। एप पर ऐसे बच्चों का नामांकन दो जगह होने के कारण अपार बनने में बाधा पहुंच रहा है।
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इस तरह हुआ दोहरा नामांकन
ग्रामीण क्षेत्र के तमाम अभिभावक शिक्षकों के आग्रह और छात्रवृत्ति, ड्रेस आदि के रुपये की वजह से परिषदीय विद्यालयों में अपने बच्चों का प्रवेश कराए हुए हैं। मगर, उनके बच्चे निजी स्कूल में पढ़ रहे हैं। इस तरह से एक ही बच्चे का दो जगह छात्र संख्या दर्ज है। अपार बनाते समय उनका एक जगह ही डाटा शो हो रहा है।
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कोट
ऐसे बच्चे जिनका प्राइवेट और सरकारी स्कूल दोनों जगह नामांकन है, उनके माता-पिता या अभिभावक जिस विद्यालय से सहमति पत्र देंगे, उस विद्यालय से बच्चे का अपार बनाया जाएगा। अब तक प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल में पढ़ने वाले 82 फीसदी छात्र-छात्राओं का अपार बनाया जा चुका है।
- अनूप कुमार, बीएसए