बस्ती। शहरी क्षेत्र में वाटर लॉगिंग से बचने की योजना के तहत पिछले तीन माह से विशेष सफाई अभियान चल रहा है। लाखों रुपये खर्च के बाद भी मालवीय मार्ग पर नाला जाम है। करीब तीन किमी की इस सड़क पर मालवीय मार्ग के निकट तो नाला का निर्माण ही नहीं हुआ है। ऐसे में पानी का बहाव भी यहां बाधित है।
मानसून से पहले दो दिन बारिश से आगाज हो चुका है। इन स्थितियों को देखते हुए शहर में पानी भरने की समस्या दूर करने के लिए बनाए गए मालवीय मार्ग के नालों की हालात की शनिवार को पड़ताल की गई। मार्च से लेकर मई तक वार्ड वार सफाई का अभियान भी नगर पालिका प्रशासन ने चलाया। इस पर अब तक चार लाख से अधिक खर्च भी हो गया, मगर नालों के रास्ते पानी निकलेगा भी इसे लेकर संशय है। हालांकि अभी भी सफाई अभियान का क्रम जारी है, मगर केवल गिने चुने स्थलों पर।
एलआईसी के निकट का हाल
एलआईसी के निकट बहने वाले नाले में पन्नी व प्लास्टिक गिलास के अलावा बड़े पैमाने पर प्लास्टिक व थर्माकोल की थालियों से पटे हैं। हालांकि यहां पानी भी नजर आ रहा है, मगर वह ठहरा है, जिससे ओवरफ्लो की स्थिति बनी हुई है।
बैरिहवां में नाला की स्थिति
मालवीय मार्ग पर बैरिहवां के निकट दो स्थानों पर नाला पूरी तरह पट गया है। यहां बड़े पैमाने पर सिल्ट से नाले भरे हुए हैं। इनकी सफाई कब हुई थी किसी को मालूम नहीं है। यहां आगे भी नालों की यही स्थिति है।
यहां नाला बना ही नहीं
रौता चौराहा के आगे अमरूद बाग की खाली पड़ी जमीन में कई मोहल्लों का पानी आता है। यहां खुदाई तो की गई मगर आधा किमी नाला निर्माण आज तक नहीं हो सका है। इसके चलते यहां कूड़े-कचरे के ढेर लगे हुए हैं। और तो और अमरूद बाग की खाली पड़ी जमीन में जहां पानी एकत्रित होता है वहां संक्रामक बीमारी की आशंका बढ़ गई है।
यहां सिल्ट से पड़ गया नाला
मालवीय रोड स्थित एक मैरिज हाल के निकट से गुजरने वाला नाला सिल्ट से इस कदर पट गया है कि यहां पानी जमा हो रहा है। जबकि नाले में सूखी मिट्टी भी साफ नजर आ रही है। ऐसे में आसपास के आधा दर्जन मोहल्लों का पानी जाम है।
बिजली दफ्तर के निकट ओवरफ्लो हो रहा नाला
बिजली दफ्तर के ठीक सामने स्थित नालों में पानी सिरे तक आ गया है। यहां के लोग बताते हैं कि कभी भी नाले की सफाई नहीं कराई गई। यहां कई घरों में तो नाला का पानी भी घुस जाता है।
नगर पालिका ने कागजों में झोंक दी ताकत
नाला सफाई पर पालिका प्रशासन ने करीब चार लाख रुपये व्यय किए हैं। हालांकि, अभियान के दौरान जहां लखनऊ के सफाई कर्मियों के दस-दस की टीम काम कर रही थी, वहीं, हर वार्ड से एक-एक कर्मी भी अभियान में लगाया गया था। यानी नगर पालिका के 25 सफाई कर्मियों की टीम अभियान में जुटी रही। यही नहीं दो जेसीबी व दो छोटी मशीन व चार ट्रैक्टर ट्रॉली को अभियान से जोड़ा गया था। इसके अलावा गांधी नगर से भुअर जाने वाले तथा आवास विकास कालोनी के नालों को रात में साफ किया गया।
बोले ईओ
प्रभारी अधिशासी अधिकारी केके चौबे ने कहा कि तीन माह अभियान के बावजूद अब भी कई स्थानों पर सफाई का कार्य बाकी रह गया है। अभियान के दौरान चूंकि निगरानी के लिए लगाए लिए निरीक्षक अवकाश पर चले गए थे, मगर उनकी गैर मौजूदगी में पालिका कर्मियों ने सफाई कार्य पूरा करा दिया है। काम अब भी जारी है।
पानी भरने से रोकने का प्रयास जारी
नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष रूपम मिश्रा ने कहा कि लगातार सफाई का कार्य चल रहा है। शहर के करीब दो सौ किमी नालों की सफाई कराने में टीम जुटी हुई है। बरसात में वाटर लॉगिंग न हो इसका प्रयास जारी है। नागरिक समस्याओं पर पालिका संवेदनशील है।
क्या कहते हैं नागरिक
मालवीय रोड निवासी विभा कहती हैं कि नाला जाम होने से मोहल्ले की नाली ओवर फ्लो होकर घर के पास बहने लगती है। जिससे मजबूरन इसी से आना जाना पड़ता है। सफाई ने होने से मच्छर बढ़े हैं।
बैरिहवा के दवा व्यवसायी बलराम श्रीवास्तव कहते हैं कि सफाई के नाम पर पालिका औपचारिकता निभा रहा है। यहां नाला जाम तो है ही मच्छरों का भी प्रकोप बढ़ गया है। इससे बीमारियां बढ़ रही हैं।
नागरिक अमर कहते हैं कि मालवीय रोड क्या शहर के अधिकांश नाले अब भी जाम हैं। अभियान मात्र औपचारिकता है। पिछले पांच वर्षों में पालिका में सफाई के नाम पर धन की बंदरबांट की गई।
उमेश चंद्र गुप्त कहते हैं कि मालवीय मार्ग पर नाला निर्माण बेहद गलत ढंग से हुआ है। ठेकेदार ने नाली के तल को बनवाया ही नहीं है। रेलवे स्टेशन रोड पर नालों के स्थान पर नालियां अधूरी हैं।