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Basti News: बच्चों पर न दबाव बनाएं... क्षमता को समझे और बढ़ाएं मेलजोल

Wed, 26 Feb 2025 11:25 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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तनाव से आता है खुद को खत्म करने का ख्याल
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मोबाइल कल्चर ने बच्चों और माता-पिता में बढ़ाईं दूरियां

संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। सोमवार की रात 12वीं के छात्र आदर्श पांडेय का फंदे से लटका हुआ शव बैरिहवा स्थित प्राइवेट हास्टल में उसके कमरे में मिला। इस घटना ने अभिभावकों को झकझोर दिया है। आदर्श के मित्रों और पड़ोसियों के मुताबिक उसका फिजिक्स का पेपर खराब हो गया था, तभी से वह निराश था। घटना के संबंध में शिक्षाविद्, मनोचिकित्सक, अभिभावकों की राय है कि पढ़ाई को लेकर बच्चों पर अधिक दबाव न बनाएं। अपेक्षित परिणाम न आने पर दबाव व तनाव की वजह से युवा विद्यार्थी में खुद को खत्म करने का ख्याल आता है। बच्चों से बात करें और उनकी समस्याएं सुनें।
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दबाव से अवसाद के शिकार हो रहे युवा
जिला अस्पताल के मनो चिकित्सक डॉ. एके दूबे बताते हैं कि अभिभावक बच्चों की प्रतिभा और उसकी क्षमता को जाने बिना ज्यादा दबाव बनाने लगते हैं। इससे युवा तनाव में आकर अवसाद के शिकार हो रहे हैं। दूसरे मोबाइल कल्चर ने बच्चों और माता-पिता के बीच दूरियां बढ़ा दी हैं। बच्चों से बात न होने से हम उन्हें समझ नहीं पाते।
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- बच्चों को उचित परामर्श जरूरी

मनोविज्ञान के शिक्षक डॉ. राजेंद्र बौध का कहना है कि किसी लक्ष्य को प्राप्त करने और उसके सापेक्ष परिणाम न आने की वजह युवा कुंठा के शिकार हो रहे हैं। तनाव के कारण वह आत्महत्या की तरफ उत्सुक हो जाते हैं। उचित काउंसिलिंग और परामर्श ये ये भावनाएं कम की जा सकती हैं।
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परीक्षा में तनाव न लें बच्चे
अभिभावक ज्योत्सना सिंह का कहना हे कि बच्चों को परीक्षा के दौरान तनाव नहीं लेना चाहिए। जिंदगी में आगे भी परीक्षा देना है। पेपर अव्छे होंगे। उन्होंने कहा कि पेपर बच्चों के स्तर का होना चाहिए। आईआईटी और नीट के स्तर का नहीं।
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पेपर बच्चों के स्तर का होना चाहिए
राजकीय इंटर काॅलेज के जीव विज्ञान के शिक्षक डॉ. विवेक मणि त्रिपाठी का कहना है कि बच्चे का दोष नहीं, बल्कि पेपर बनाने वाले का दोष है। प्रश्नपत्र तीन स्तर के बनते है पहला सबसे सरल, थोड़ा कठिन, तीसरा कठिन। पेपर ऐसा होना चाहिए कि कमजोर विद्यार्थी भी हल कर लें और जो तेज विद्यार्थी को कुछ प्रश्न कठिन लगे।
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- ये लक्षण दिखे तो हो जाएं सतर्क
बच्चा अत्म हत्या करने जैसी बात करे, या धमकी दे। उदास, चिंतित और अवसादग्रास्त दिखाई दे।ज्यादा समय अकेले रहे। अपने में खोया रहे तो अभिभावक को चाहिए कि वह बच्चों से बात करे और उनकी समस्याओं को सुने। जरूरत पड़ने पर काउंसर के पास भी लेकर जाएं।
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