जिला अस्पताल में डेढ़ वर्ष से डिजिटल एक्स-रे मशीन बंद
बस्ती। अत्याधुनिक संसाधनों से सुसज्जित जिला चिकित्सालय में सब कुछ है। लेकिन, यहां डिजिटल एक्सरे पर डेढ़ वर्ष से उपेक्षा का ताला लटक रहा है। इसके चलते मरीजों को बाहर से एक्स-रे कराना मजबूरी बन गई है।
मरीजों की इस मजबूरी के कारण जिला अस्पताल के निकट मौजूद कई एक्स-रे सेंटर मोटी रकम कमा रहे हैं। अस्पताल प्रशासन की चुप्पी के चलते गरीबों को मिलने वाली निशुल्क सेवा पूरी तरह से बंद हो गई है। जिम्मेदार इसके लिए सिस्टम की खराबी बता रहे हैं।
जिला अस्पताल में करीब तीन साल पहले डिजिटल एक्स-रे मशीन संचालित की गई। हर दिन यहां करीब तीन से चालीस मरीजों का एक्स-रे होता था। करीब एक साल तक यह मशीन बेहतर ढंग से काम किया। इसी बीच एकाध बार मशीन में तकनीकी दिक्कत आई तो तत्कालीन अधिकारियों ने शासन को पत्र लिखा, जिस पर कंपनी से आए तकनीकी टीम ने उसे ठीक कर दिया, मगर खराब होने का क्रम लगातार जारी रहा। एक वर्ष बाद सप्ताह में एक दिन मशीन में कोई न कोई दिक्कत आने लगी और करीब डेढ़ वर्ष पहले यह पूरी तरह खड़ी हो गई। इसके बाद डिजिटल एक्स-रे सिस्टम में खराबी बताकर इसे बंद कर दिया गया। यहां के कर्मी सामान्य एक्स-रे के लिए वापस भेज दिए गए। तब से लेकर आज तक न तो इसकी किसी ने सुधि ली और न यह फिर से शुरू हो सका।
बोले, मरीज
जिला अस्पताल के ओपीडी में दिखाने आए सल्टौआ के राम गोपाल ने कहा कि चिकित्सक ने उन्हें डिजिटल एक्स-रे की सलाह दी है, मगर यहां नहीं है। अब इसके चलते बाहर ही एक्स-रे कराएंगे, जिस पर करीब तीन सौ रुपये का खर्च आएगा। सरकार की निशुल्क योजनाएं यहां कागजों में दौड़ रही हैं और मशीन ठीक नहीं है। यहीं, पहुंचे मुंडेरवा के श्याम शंकर सोनी ने कहा कि चिकित्सक ने उन्हें एक्स-रे की सलाह दी है। कहा है कि डिजिटल एक्स-रे हो जाए तो बेहतर है। अब यहां तो सुविधा बंद है। ऐसे में बाहर से रुपये देकर ही एक्स-रे कराया जा सकेगा।
अस्पताल की डिजिटल एक्स-रे मशीन खराब है। इसके सिस्टम में कोई तकनीकी खराबी आ गई है। इसको ठीक कराने के लिए पत्र लिखा गया है। वैसे सामान्य एक्स-रे मशीन संचालित हो रही है।
-डॉ. आलोक कुमार वर्मा, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल