ट्रॉफी के साथ स्मिता व सविता, फाइल फोटो
बस्ती। सीमित संसाधन, गांव की सामाजिक बंदिशें और पिता को खोने का दुख भी दो बहनों के हौसले को नहीं डिगा सका। शहर से सटे डारीडीहा पांडेयडीह गांव की स्मिता और सविता ने हैंडबॉल में राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। दोनों बहनें 10 साल से साथ खेल रही हैं। अब उनका लक्ष्य बेहतर प्रदर्शन कर खेल में मुकाम हासिल करना और परिवार का सहारा बनना है।
दोनों बहनें शहीद सत्यवान सिंह स्पोर्ट्स स्टेडियम बस्ती में नियमित अभ्यास करती हैं। वर्ष 2016 में उन्होंने स्टेडियम में हैंडबॉल का प्रशिक्षण शुरू किया था। स्मिता ने बेगम खैर गर्ल्स इंटर कॉलेज में दाखिला लिया और वर्ष 2017 में राजस्थान में आयोजित स्कूली राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पहली बार हिस्सा लिया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। स्मिता अब तक छह राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खेल चुकी हैं। उनके नाम एक स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक है। वहीं, सविता भी 10 से अधिक राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा दिखा चुकी हैं।
दोनों बहनों के लिए खेल का सफर आसान नहीं रहा। उनके पिता जसवंत कुमार पंचायतराज विभाग में सफाईकर्मी थे। वर्ष 2025 में लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया। इसके बाद परिवार पर आर्थिक संकट गहरा गया और बहनों के सामने खेल जारी रखने की चुनौती खड़ी हो गई। स्मिता बताती हैं कि पिता के निधन से दोनों बहनें टूट गई थीं लेकिन भाई सौरभ ने उन्हें संबल दिया और खेल जारी रखने के लिए प्रेरित किया। उनकी मां ने भी कठिन परिस्थितियों में परिवार को संभाला। पिता ने जीवनभर सीमित आय के बावजूद बच्चों के सपनों को पूरा करने में सहयोग किया था। अब दोनों बहनें अपनी मेहनत के दम पर परिवार की जिम्मेदारी उठाना चाहती हैं। इसी उम्मीद के साथ वे रोजाना शाम चार बजे से स्टेडियम में अभ्यास करती हैं।
सामाजिक बंदिशों के बीच बनाई पहचान
स्मिता के मुताबिक, जब उन्होंने खेल की दुनिया में कदम रखने की इच्छा जताई तो शुरुआत में परिवार के लोग भी इसके लिए तैयार नहीं थे। गांव का माहौल ऐसा था कि लड़कियों के घर से बाहर निकलकर खेलने को सहजता से नहीं देखा जाता था। हालांकि, परिवार का साथ मिलने के बाद उन्होंने बहन के साथ स्टेडियम पहुंचना शुरू किया। लगातार मेहनत और प्रदर्शन के दम पर आज दोनों राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी हैं। स्मिता कहती हैं कि चुनौतियां हर कदम पर हैं लेकिन धैर्य और मेहनत के साथ आगे बढ़ा जा सकता है। दोनों बहनों का लक्ष्य खेल में अपनी पहचान मजबूत करना, बेहतर प्रदर्शन करना और परिवार को आर्थिक रूप से सहारा देना है।