बस्ती। समय रहते बाढ़ परियोजनाओं को शुरू न करने का असर अब देखा जा रहा है। सुरक्षा के लिए जिन जगहों पर डैंपनर, स्पर बनाए जा रहे हैं, वहां तक नदी का पानी पहुंच गया है।
सदर तहसील के अति संवेदनशील मईपुर, महुआपार कला और महुआपार खुर्द को सुरक्षित करने के लिए शुरू की गई 24 करोड़ की परियोजना भी लापरवाही से लेट-लतीफी का शिकार हो गई, जिससे अब बांध पर खतरा बढ़ गया है। हालांकि, बाढ़ खंड का दावा है कि समय रहते डैंपनर, स्पर का निर्माण पूरा किया जाएगा।
नदी के तटवर्ती गांव माझा फूलपुर के पास बाढ़ खंड की ओर से अस्थाई बांध बनाया गया था। ताकि नदी का पानी निर्माण स्थलों पर न पहुंच सके। इधर, नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद मंगलवार की रात यह बांध कट गया, जिससे निर्माण स्थलों पर पानी पहुंच गया। आधा-अधूरा कार्य देखने के बाद ग्रामीणों को पिछले साल की याद फिर से ताजा हो जा रही है।
बाढ़ पीड़ित राम सुभग कहते हैं कि केवल सुरक्षा कार्यों का ढिढोरा पीटा जा रहा है। हम लोगों का गांव पहले की तरह आज भी असुरक्षित हैं। अगर नदी विकराल रूप लेगी तो ये छिटपुट कार्य धारा में बह जाएंगे। कटान से हमारे गांव को कोई बचा नहीं पाएगा।
रामचंद्र ने कहा कि यदि समय रहते निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया होता तो इस बार बाढ़ से जरूर राहत मिलती। लेकिन, अब तो नदी भी बढ़ने लगी है। कार्यस्थल तक पानी पहुंच गया है।
पिछले साल से यह तीनों गांव अतिसंवेदनशील श्रेणी में रखे गए हैं। बाढ़ खंड ने इन गांवों को नदी से सुरक्षित करने के लिए 24 करोड़ का प्रस्ताव तैयार किया। शासन से स्वीकृति मिलने के साथ ही 30 जून तक सभी कार्य पूरे करने के लिए समय सीमा निर्धारित की गई।
इस बजट से बाढ़ खंड को अतिसंवेदनशील इन तीन गांवों और नदी के बीच सुरक्षा के लिहाज से दो स्पर, 26 डैंपनर, 1200 परकोपाइन और बोल्डर पिचिंग का कार्य करना था। निर्माण स्थल पर पिछले दिनों जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, डीएम रवीश गुप्ता भी पहुंचे थे। बाढ़ खंड के अफसरों को समय भीतर निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन माैके पर स्थिति देखकर हकीकत देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है।