बस्ती। निजी अस्पतालों में मौत पर मौत के बाद भी स्वास्थ्य विभाग शिकंजा करने में नाकाम है। हर मौत के पीछे डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगता है। शुरुआत में स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई करने का दम भरता है। अस्पताल सीज भी किए जाते हैं, मगर समय के साथ सबकुछ पुराने ढर्रे पर लौट आता है। अस्पताल भी खुल जाते हैं और मरीजों की भीड़ भी लगने लगती है।
कुछ ऐसा ही मामला दक्षिण दरवाजा-जिला अस्पताल मार्ग पर स्थित एक निजी अस्पताल में हुआ। वहां दो सप्ताह से भर्ती नवजात की मौत के बाद शनिवार को परिवार वालों ने जमकर हंगामा किया था। इस अस्पताल में पहली बार कोई घटना नहीं हुई है, बल्कि पहले भी अंगुली उठ चुकी है। करीब साल भर पहले भी इस अस्पताल में हंगामा हो चुका था। तब भी डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगा था। तब स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल का एनआईसीयू को सील कर दिया था।
बाद में एनआईसीयू खोल दिया गया और अस्पताल में बच्चे को भर्ती किए जाने लगे। अब फिर इस पर दाग लग गया है। सिर्फ यही एक अस्पताल नहीं है, जहां हंगामा हुआ हो। शहर के कई अस्पतालों में डॉक्टरों की लापरवाही से मौत और अधिक रुपये वसूलने का आरोप लग चुका है।
बात दें कि मूलत: गोरखपुर के गगहा और फिलहाल सदर कोतवाली क्षेत्र के कटरा मोहल्ला निवासी जयराम की पत्नी ने 21 नवंबर को मालवीय रोड स्थित एक अस्पताल में जुड़वा बच्चे को जन्म दिया था। जयराम का आरोप है कि बच्चों के जन्म लेने के बाद उस अस्पताल से दक्षिण दरवाजा-जिला अस्पताल मार्ग पर स्थित एक अस्पताल में एंबुलेंस से भेज दिया गया। बच्चों में एक बेटी है, उसे 29 नवंबर को डिस्चार्ज कर दिया गया, मगर बेटे को भर्ती रखा गया।
उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवार की सुबह अचानक यह कहते हुए बच्चे को डिस्चार्ज कर दिया गया कि अब वह स्वस्थ है, जबकि उसके शरीर में कोई हरकत नहीं थी। बच्चे के शरीर में हरकत न होने के बावत पूछने पर डॉक्टर ने कहा कि दवा का असर है। न तो बीमारी के बारे में बताया गया और न ही बच्चे से मिलने दिया गया। सिर्फ इतना कहा गया कि कुछ देर में ठीक हो जाएगा। पांच दिसंबर को बच्चे की मौत हो गई।
उन्होंने बताया कि डीएम को शिकायती पत्र देकर अस्पताल पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने डीएम को दिए शिकायती पत्र में कहा है कि उनके अलावा कई अन्य पीड़ित हैं जो अपना साक्ष्य और सबूत देने के लिए तैयार हैं।