बस्ती। रबी सीजन की शुरुआत में ही डीएपी की मांग बढ़ गई है। अगेती खेती करने वाले किसानों की धान की फसल कटकर घर पहुंच चुकी है। खाली खेत में लोगों ने सरसों, चना, मटर की बुवाई शुरू कर दी है। इसके लिए डीएपी की जरूरत पड़ रही है।
इधर, दीपावली की छुट्टी होने से तीन-चार दिन से समितियां बंद हैं। किसान डीएपी के लिए दौड़भाग कर रहे हैं। इस बार फार्मर रजिस्ट्री कराने वाले किसानों को वितरण में प्राथमिकता दी जा रही है। जिन किसानों की फार्मर रजिस्ट्री नहीं हुई है, उन्हें खाद मिलने में कठिनाई हो रही है।
पिछले साल अक्तूबर में 2403 और नवंबर में 7242 मीट्रिक टन डीएपी वितरित हुई थी। इस बार अक्तूबर में डीएपी वितरण का लक्ष्य 2041 और नवंबर में 7292 मीट्रिक टन निर्धारित है। इस तरह दोनों महीनों में 9333 मीट्रिक टन डीएपी का वितरण होना है। अभी सरसों और तोरिया की ही छिटपुट बुवाई शुरू हुई है। इसलिए छिटपुट मात्रा में ही किसानों को डीएपी की जरूरत पड़ रही है। लेकिन, पिछले दिनों यूरिया वितरण को लेकर जगह-जगह मचे हाहाकार के कारण किसान अभी से इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करना चाह रहे हैं।
वहीं महकमा अपनी किरकिरी कराने से बचने के पहले से अलर्ट है। कृषि विभाग के अनुसार, अक्तूबर और नवंबर माह के लिए निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप 8410 मीट्रिक टन डीएपी की उपलब्धता सुनिश्चित है। लेकिन, इस बार किसानों को बल्क में डीएपी नहीं दी जाएगी। मानक के अनुरूप ही वितरण कराने की तैयारी है। निजी क्षेत्र के दुकानदारों के यहां 3044 एमटी डीएपी पहुंचा दी गई है। इसके अलावा 126 समितियों पर भी डीएपी की उपलब्धता सुनिश्चित कर दी गई है।
इस मानक पर डीएपी बांटने की है व्यवस्था: इस बार फार्मर रजिस्ट्री कराने वाले किसानों को एक हेक्टेयर कृषि भूमि की खतौनी पर 3 बोरी डीएपी उपलब्ध कराई जाएगी। समिति के सचिव और दुकानदारों को इसी मानक के अनुसार डीएपी वितरण के निर्देश दिए गए हैं। किसान की खतौनी में रकबा के अनुसार मानक से मिलान करके डीएपी देना होगा।