प्रकरण का खुलासा करने में प्रभारीनिरीक्षक रुधौली रामकृष्ण मिश्र, प्रभारी सर्विलांस सेल दुर्विजय, प्रभारीसाइबर सेल मजहर खान, श्याम सुंदर, कांस्टेबल संदीप कुमार साइबर सेल, दीपक कुमार, मोहन यादव, घनश्याम यादव, सत्येंद्र कुमार, हिंदे आजाद की अहम भूमिका रही। गिरफ्तार आरोपी ने बताया गया कि एक ऐप के जरिए उसने फर्जी वीओआइपी नंबर जनरेट किया। उसी वीओआइपी नंबर के माध्यम से फर्जी व्हाट्सएप एकाउंट बनाकर पीड़िता व उसके परिवार वालों को कॉल करके धमकी देता था। उसे पूर्ण विश्वास था कि इस ऐप के जरिए व्हाट्सएप से मैसेज करने पर पुलिस उसे पकड़ नहीं पाएगी।
क्या है वीओआईपी नंबर
वायस ओवर इंटरनेट प्रोटाकॉल यानी वीओआईपी एक तरह की इंटरनेट कालिंग है जो वाईफाई के जरिए की जाती है। प्राय: इसे खराब नेटवर्क या कॉल ड्राप की समस्या को देखते हुए इस्तेमाल किया जाता है। इसमें आसानी से उपयोग करने वाला अपनी पहचान छिपा सकता है।
यह है पूरा मामला
रुधौली थानाक्षेत्र की एक युवती को पिछले छह महीने से आरोपी परेशान कर रहा था। फोन, टेक्स्ट मैसेज, व्हाट्सएप और इंटरनेट कॉलिंग के जरिए उसे अशोभनीय कॉमेंट और अपशब्द कह रहा था। इतना ही नहीं उसके पिता से लेकर भाई बहन मां को भी ऐसे मैसेज भेजता था। फोन करने वाला शख्स कोई बात नहीं करता, सिर्फ मैसेज के जरिए ही वह उसे परेशान कर रहा था। जहां वह ट्यूशन पढ़ने जाती थी, वहां के टीचर को भी मैसेज भेजने लगा, जिससे उसका ट्यूशन भी छूट गया।
पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मनचले के खिलाफ दो बार मुकदमा दर्ज किया है। लेकिन पुलिस उसे पकड़ नहीं सकी। इन सबके बीच युवती गहरे अवसाद में आ गई और उसने आत्महत्या करने का भी प्रयास किया। इस बीच परिवार वालों के साथ उसने आईजी राजेश मोडक से मिलकर इच्छा मृत्यु की इजाजत मांगी। जिसके बाद पुलिस महकमे में खलबली मच गई।