मतदान के लिए रेल लाइन करनी होगी पार
गौर (बस्ती )। मतदान प्रतिशत बढ़ाने में सबकी भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चुनाव आयोग के निर्देश पर प्रशासनिक स्तर पर दिन-प्रतिदिन मतदाता जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। लेकिन, ग्रामीण क्षेत्रों के तमाम ऐसे गांव हैं, जहां आज भी विकास की बात बेमानी है। ऐसा ही सल्टौआ ब्लॉक का राजस्व गांव अटरा है, जहां रास्ता ही नहीं है। कोई सरकारी भवन न होने से रेलवे लाइन से सटे इस गांव के लोगों ने रेलवे लाइन की क्रासिंग को ही मुख्य रास्ता बना लिया है। तीन मार्च को भी गांव के लोगों को जान जोखिम में डालकर मतदान करने जाना मजबूरी है।
मौजूदा समय में जहां सभी राजनीतिक पार्टियों ने प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है। ग्रामीणों से वादे भी खूब किए जा रहे हैं। लेकिन, चुनाव के बाद उन पर अमल होगा। इसे लेकर ग्रामीणों में संशय बना है। कुआनो नदी व रेलवे लाइन के किनारे बसे इस गांव की जनसंख्या 700 के करीब है, लेकिन, गांव में आजादी के बाद से अभी तक सरकारी भवन की बात तो दूर सड़क तक नसीब नहीं हो पाई।
इन ग्रामीणों की भी सुनें
अटरा गांव की संगीता यादव बताती हैं कि चुनाव के समय राजनीतिक पार्टियों की ओर से बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं लेकिन, चुनाव खत्म होते ही सारे वादे भूल जाते हैं। गांव की तस्वीर आज भी नहीं बदली। गांव में रास्ता और मूलभूत सुविधाएं न होने से ठंड के मौसम में मांगलिक कार्य नहीं हो पाते। अप्रैल और मई माह में जब खेतों से गेहूं की मड़ाई खत्म हो जाएगी। तभी गांव में कोई मांगलिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। यह परंपरा आजादी के बाद से चली आ रही है।
इसी गांव के बलेशर यादव ने बताया कि वोट हर पार्टी को चाहिए, लेकिन गांव में मतदान केंद्र न होने से लोगों को डेढ़ किमी दूर रेलवे लाइन पारकर प्राथमिक विद्यालय हरदिया शुक्ल जाना होगा। तभी लोग अपने मताधिकार का प्रयोग कर पाएंगे। उन्होंने बताया कि सुबह से शाम तक जान जोखिम में डालकर गांव के लोग रेलवे लाइन के रास्ते अपनी दिनचर्या को पूरा करते हैं।
अटरा गांव के रूपक यादव ने बताया कि रास्ता न होने से सबसे ज्यादा दिक्कत पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं को हो रही है। गांव में प्राथमिक विद्यालय न होने से बच्चों को शिक्षा ग्रहण के लिए डेढ किमी दूर व हाईस्कूल और इंटर की शिक्षा के लिए पांच किमी दूर वाल्टरगंज रेलवे लाइन पार करके जाना पड़ता है। ऐसे में हमेशा अनहोनी की आशंका बनी रहती है। गांव में रास्ता न होने से अधिकांश लोग मतदान करने में रुचि नहीं ले रहे हैं।
इसी गांव के विजय यादव ने बताया कि गांव में कोई बीमार हो जाए तो एंबुलेंस नहीं आ सकती है। साल में केवल एक बार गर्मी के मौसम में ही कोई मांगलिक कार्य कर सकते हैं। उस समय भी दूल्हा और दुल्हन को पैदल रेलवे लाइन पार करना होगा। तभी वह अपने घर में पहुंच पाएंगे। यह सिलसिला वर्षों से चला आ रहा है।
बोलीं ग्राम प्रधान
ग्राम प्रधान शशि कला शुक्ला ने बताया कि गांव में आने जाने के लिए कोई रास्ता नहीं है। मजबूरन अटरा गांव के लोग जान जोखिम में डालकर रेलवे लाइन पार कर आना जाना पड़ता है।दस्थानीय विधायक के माध्यम से दो किमी पिच मार्ग के लिए प्रस्ताव दिया गया है, लेकिन गांव में चकबंदी प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में कार्य हो पाना संभव नहीं है। गांव में सरकारी भवन के तौर पर प्राथमिक विद्यालय व सामुदायिक भवन का यदि निर्माण हो जाए तो गांव के नौनिहालों को अच्छी शिक्षा भी मिलेगी और हर बार के चुनाव में मतदान करने में सहूलियत मिलेगी।
बोले सीडीओ
सीडीओ डॉ राजेश प्रजापति से ने बताया कि गांव की बहुत गंभीर समस्या है। मतदान को लेकर प्रधान और ब्लॉक के कर्मियों से बात करके कोई व्यवस्था अवश्य बनाई जाएगी, जिससे ग्रामीणों को मतदान करने में सुविधा हो सके।