वाल्टरगंज/मानिकचंद। बांसी रोड पर पैड़ा खरहरा चौराहे के पास स्थित गोदाम के सामने बुधवार को दो बाइकों की आमने-सामने से टक्कर हो गई। इसमें तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। तीनों को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां पर एक की जिला अस्पताल में मौत हो गई। गंभीर स्थिति देखकर ईएमओ ने एक घायल को लखनऊ रेफर कर दिया। वहीं, तीसरे का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है।
वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के सोनौरा निवासी यशोदानंद पाठक (50) अपनी ससुराल रुधौली क्षेत्र के डड़वा तिवारी गांव के पंकज मिश्रा (25) के साथ बाइक से वापस घर आ रहे थे। इसी बीच पैड़ा चौराहे की ओर से आ रही बाइक से टक्कर हो गई। बाइक की टक्कर में दोनों लोगों के अलावा आबिद अली (25) गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर गए। घटना में यशोदानंद पाठक का बायां पैर फ्रैक्चर हो गया। वहीं, बाइक चला रहे पंकज मिश्रा बेहोश हो गए। जबकि आबिद का दायां पैर फ्रैक्चर हुआ। हादसे के बाद आसपास के लोगों ने तीनों घायलों को एंबुलेंस मंगवाकर जिला अस्पताल भेजवाया। जहां पर इलाज के दौरान ही यशोदानंद पाठक की मौत हो गई। गंभीर रूप से घायल आबिद अली को डॉक्टरों ने लखनऊ रेफर कर दिया है। साथ ही परिवार वालों को भी सूचना दी है। पुलिस ने दोनों बाइक कब्जे में ले लिया। देर शाम तक पुलिस को घटना के संबंध में कोई तहरीर नहीं मिली थी।
हेलमेट लगाते तो बच जाती जान
बस्ती।
बिना हेलमेट बाइक लेकर लांग ड्राइव पर फर्राटा भरने का अंजाम देखने के बावजूद लोग सबक लेने को तैयार नहीं हैं। अगर जरा भी संवेदनशील होते तो आज यशोदानंद जिंदा होते। बाकी दोनों लोगों की जान जोखिम में नहीं पड़ती। मगर दुर्भाग्य से तीनों ही बाइक पर नंगे सिर सवार थे। हेलमेट नहीं लगाए थे।
यह वाकया सिर्फ नजीर है। हकीकत में रोज ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जिनमें एक्सीडेंट होने पर सिर में गंभीर चोट लगती है। एसपी संकल्प शर्मा का कहना है कि रोड पर गिरने की वजह से हेड इंजरी सबसे ज्यादा घातक है। हेलमेट न होने से घायल का रक्त काफी बह जाता है। असल में 60 हजार रुपये की बाइक शौक से खरीदते हैं लेकिन हेलमेट ऐसा जो पुलिस का चालान बचा सके। जबकि ब्रांडेड हेलमेट भी हजार रुपये के आसपास मिल जाते हैं। जानकार बताते हैं कि ऑरिजिनल हेलमेट सिर्फ दिखने में ही अच्छे नहीं होते, बल्कि लाइफ ज्यादा होती है।
सस्ते चालान बचाते हैं जान नहीं
तमाम लोग पुलिस चालान से बचने के लिए सस्ते हेलमेट खरीद लेते हैं। लोग भूल जाते हैं कि ऐसे हेलमेट चालान से बचा तो सकते हैं लेकिन जान बचाने की क्षमता इनमें नहीं होती है। आम तौर पर देखा जाता है कि कुछ बाइक चालक जब चेकिंग देखते हैं, तब हेलमेट लगाते हैं। बाकी समय में पीछे टांगकर घूमने में शान समझते हैं।
स्टाइल के चक्कर में जोखिम
हेलमेट पहनने से कतराने के पीछे वजह कई हैं। कुछ लोग उलझन महसूस करते हैं तो कई गर्मी। सिंथेटिक की रगड़ से सिर में खुजली के कारण नहीं लगाना चाहते। स्टाइल के चलते भी यूथ बचते हैं। कुछ लोग बाल झड़ने जैसी दिक्कतों के कारण ऐसा करते हैं। महिलाएं हेयरस्टाइल बिगड़ने के डर से भगती हैं। इसे देखते हुए हेलमेट और टू-व्हीलर्स निर्माताओं की संस्था सियाम (एसआइएएम) के अलावा भारतीय मानक ब्यूरो (बीईएस) के विशेषज्ञों ने परिवहन मंत्रालय को रिपोर्ट दी है कि हेलमेट डिजाइन नए मानक के अनुसार किया जाए। हेलमेट हल्का और ज्यादा खुला हो। खासकर सिर का अगला भाग और गर्दन के ऊपरी हिस्से मजबूत हों।