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साइड स्टोरी 2---प्रवक्ता पद की तैयारी के रहे थे विवेकानंद

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फाइल फोटो
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प्रवक्ता पद की तैयारी के रहे थे विवेकानंद
कोतवाली से बोल रहा हूं, तत्काल आ जाएं
अमर उजाला ब्यूरो
दुबौलिया। छावनी थाना क्षेत्र में हुए हादसे में बरसाव गांव के विवेकानंद (33) पुत्र स्व. राम अभिलाख तिवारी की भी जान चली गई। सुबह कोतवाली पुलिस ने एक्सीडेंट की सूचना घर वालों को दी। कोतवाली पहुंचने पर शव देखकर पत्नी बेसुध हो गईं।
चार भाइयों में सबसे बडे़ विवेकानंद इलाहाबाद में करीब आठ साल से अर्थशास्त्र प्रवक्ता के लिए तैयारी कर रहे थे। गांव में मां तारा देवी, पत्नी रेखा तिवारी व आठ साल की बेटी सुभी, भाई अच्युतानंद तिवारी, मनोज व बृहस्पति नाथ व एक छोटी बहन बंटी रहती थी। 20 दिन पहले घर आए थे। रविवार की शाम पत्नी रेखा के मोबाइल पर फ़ोन किए कि मैं घर आ रहा हूं। सुबह छह बजे विवेकानंद के मोबाइल से फोन आया तो घर वालों ने समझा कि भैया आ गए हैं। चौराहे पर बुला रहे हैं। लेकिन तब तक उधर आवाज आई की बस्ती कोतवाली से बोल रहा हूं। इनका एक्सीडेंट हो गया है। तुरंत आ जाइए।
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एक्सीडेंट की खबर सुनकर छोटे भाई अच्युतानंद तिवारी जो सूदीपुर इंटर कॉलेज में सहायक अध्यापक हैं। वह अपनी भाभी रेखा व अन्य परिवारी जन के साथ कोतवाली पहुंचे। यहां पता लगा कि उनकी मौत हो गई। मौत की खबर सुन भाई, पत्नी व अन्य परिजन बेसुध हो गए। घर पर छोटी बहन बंटी व मां तारा देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। रेखा सदमे के चलते बेसुध है। विवेकानंद की हादसे में मौत की खबर सुनकर रिश्तेदार व करीबी लोग पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। लोग घटना से स्तब्ध हैं।
फाइल फोटो
जिससे थी परिवार की आस, उसकी आई लाश
सिविल की तैयारी कर रहे थे मधवापुर के इंद्रसेन
अमर उजाला ब्यूरो
रुधौली। छावनी थाना क्षेत्र के हाईवे पर हुए भीषण हादसे में मरने वालों में 21 वर्षीय इंद्रसेन वर्मा निवासी मधवापुर थाना रुधौली भी शामिल हैं। 65 वर्षीय किसान राम प्रसाद अपने बड़े बेटे इंद्रसेन से बहुत कुछ उम्मीदें रखी थीं। जिसे साकार करने के लिए इंद्रेसन इलाहाबाद में जुटे थे।
रामप्रसाद अपनी खेती किसानी की बदौलत इंद्रसेन को इलाहाबाद भेज कर सिविल परीक्षा की तैयारी करवा रहे थे। रविवार को घर पर पढ़ाई का खर्च लेने के लिए इलाहाबाद से इंद्रसेन आ रहे थे लेकिन किसे पता था कि घर पर उनका बेटा नहीं बल्कि मृत शरीर आएगा। राम प्रसाद के पांच बच्चों में इंद्रसेन दूसरे नंबर पर थे। बड़ी बेटी 30 वर्षीय नीलम की शादी हो चुकी है, जबकि इंद्रसेन से छोटी 18 वर्षीय संजना, 14 वर्षीय अभयसेन और 12 वर्षीय संजू अभी पढ़ाई कर रहे हैं। चचेरे भाई विजय सेन बताया कि उसके पहले इन्द्रसेन अगस्त में रक्षाबंधन के पर घर आए थे और त्योहार के बाद वापस इलाहाबाद चले गए थे। जिन बहनों ने रक्षाबंधन पर अपने भाई को राखी बांधी थी उन्हें भी यह नहीं पता था कि इंद्रसेन के लिए यह उनकी आखिरी राखी है। पूरे परिवार ही नहीं गांव में मौत की सूचना पर कोहराम मच गया। नात रिश्तेदार भी पोस्टमार्टम हाउस की ओर रवाना हुए।
मानो मृत्यु से साठगांठ करके पहुंचा हो ट्रॉला
प्रत्यक्षदर्शी ने बयां किया हादसे का मंजर
50 मीटर तक बिखरे थे शवों के हिस्से : ढाबा मालिक
अमर उजाला ब्यूरो
विक्रमजोत। एक साथ सात बस यात्रियों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत का मंजर जिसने भी देखा, उसका कलेजा मुंह को आ गया। लोगों में सबसे ज्यादा उस परिस्थितियों को लेकर चर्चाएं होती रहीं कि आखिर ऐसा क्या हुआ होगा कि आठों की नजर पीछे से पहुंचे ट्रेलर पर नहीं पड़ी। ढाबा चलाने वाले प्रत्यक्षदर्शी राजबली सिंह ने बताया कि उक्त बस रात्रि लगभग दो बजे आकर ढाबे पर रुकी। ड्राइवर-कंडक्टर के अलावा तमाम यात्रियों ने चाय पी। करीब आधे घंटे बाद जब सभी लोग बैठ गए तो बस स्टार्ट ही नहीं हुई। 20 मिनट तक धक्का लगाया लेकिन इंजन टस से मस नहीं हुआ। अलबत्ता किनारे से वह बस फोरलेन के बीच आ गई। तब तक घड़ी में 2:45 बज चुका था। एकाएक तेज आवाज हुई। लोग बस की तरफ दौड़े तो कई लाशें क्षत-विक्षत देखकर कलेजा मुंह को आ गया। कई हिस्से 50 मीटर तक जा बिखरे थे।

जूझता रहा सरकारी अमला
विक्रमजोत। सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। कुछ ही देर में पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच गए। चौकी प्रभारी घघौवा बिंदेश्वरी मणि त्रिपाठी थानाध्यक्ष परशुरामपुर पंकज गुप्ता के अलावा थानाध्यक्ष छावनी अरविंद कुमार शाही, चौकी प्रभारी विक्रमजोत संतोष कुमार सिंह भी पहुंचे। करीब घंटा भी नहीं बीता कि एसपी दिलीप कुमार, एएसपी, सीओ, एसडीएम, थानाध्यक्ष हर्रैया मय फोर्स पहुंच गए और मदद में जुटे रहे।
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परीक्षा देकर लौटे थे रमेश
बनकटी। महुली थाने के हरपुर भैसहियां निवासी 22 वर्षीय रमेश पुत्र लालजी की रविवार को इलाहाबाद में कोई परीक्षा थी। वापस उसी बस से आते समय हादसा हो गया, जिसमें रमेश की मृत्यु हो गई। सबसे बड़े रमेश के बाद उनके छोटे भाई विरेंद्र और दो बहनें हैं, जिनमें एक बहन की शादी हो चुकी है। झोला छाप इलाज करके परिवार चला रहे पिता लालजी यादव की माली हालत ठीक नहीं है। जमीन भी बिक चुकी है। उसी बस में चित्रकूट में एंबुलेंस चलाने वाले लालगंज थाने के देईसाड़ निवासी 28 वर्षीय शैलेन्द्र भी बैठे थे। उन्हें गंभीर चोट आई थी।
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