बस्ती। नकली खोआ और मिलावटी पनीर को लेकर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम सक्रिय हो गई है। विभाग ने कानपुर, नवाबगंज, जौनपुर से बल्क में मंगाए जा रहे मिलावटी पनीर, नकली खोआ की खेप पकड़ने के लिए पूरी तैयारी की है। इसके लिए संभावित अड्डों पर छापा मारा जाएगा। भोर में गाड़ियों से बड़े-बड़े गट्ठर में उतरने वाले खोआ और पनीर को पकड़ा जाएगा, ताकि बाजार में इसकी खपत होने से पहले ही नष्ट कर दिया जाए। टीम इसको लेकर निगरानी बढ़ा दी है।
सहालग शुरू होते ही बाजार में दूध, पनीर और खोआ की मांग बढ़ गई है। इसका फायदा उठाने के लिए मिलावट करने वाले धंधेबाज सक्रिय हो गए हैं। पाउडर और पैकेट के दूध में आरारोट मिलाकर बने पनीर सस्ते दर पर धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं। मिलावट के इस खेल में सेहत को सुरक्षित रख पाना मुश्किल हो गया है। इसकी पुष्टि खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से एकत्र पनीर और खोआ की जांच रिपोर्ट भी कर रही है। अनुमान के मुताबिक शहर में दुकानों से लेकर घरों में करीब दो लाख लीटर दूध की खपत प्रत्येक दिन होती है। हालांकि लोगों की मांग के हिसाब से यह घटती-बढ़ती है। सहालग, त्योहार व अन्य विशेष अवसरों पर इसकी खपत करीब तीन से चार लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंच जाती है, जबकि, पशुपालक करीब एक लाख लीटर दूध की ही आपूर्ति कर पाते हैं। वहीं पैकेट दूध का कारोबार करने वाली कंपनियां भी करीब एक से सवाल लाख लीटर दूध की आपूर्ति कर रही हैं। शेष बचे एक लाख लीटर दूध की आपूर्ति मिलावट से होती है। जानकारों ने बताया कि शादी-विवाह के सीजन में मांग पूरी करने के लिए धंधेबाज यह तरकीब अपनाए हुए हैं।
उत्पादन कम और खपत अधिक
उत्पादन कम और खपत अधिक होने का ही लाभ धंधेबाज उठाते हैं। वे गाय-भैंस के 10 लीटर दूध के साथ पाउडर से बना दूध भी उतनी ही मात्रा में मिला देते हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से बीते अप्रैल तक पनीर के 27 और खोवा के 12 नमूने एकत्र किए गए। इसमें से पनीर के तीन और खोआ के दो नमूनों की जांच रिपोर्ट मिली है। प्रयोगशाला से मिले पनीर के दो जांच रिपोर्ट में से नमूने फेल मिले हैं। इसी तरह खोआ के मिले दो जांच रिपोर्ट में से एक नमूने की रिपोर्ट अधोमानक मिली है। इस जांच रिपोर्ट में फैट कम होने की पुष्टि हुई है।
क्रीम निकाल कर बिक्री कर रहे दूध
जानकारों के अनुसार मिलावटखोर दूध से क्रीम निकाल लेते हैं। कई मिलावटखोर पाउडर के दूध से पनीर तैयार करते हैं। पनीर और खोआ में चिकनाहट रहे इसके लिए उसमें रिफाइन या पाॅप आयल मिलाकर तैयार कर देते हैं। मांग बढ़ने पर धंधेबाज पानी तो मिलाते ही हैं अब पाउडर से बना दूध भी बाजार में बेच दे रहे हैं। पशुपालन विभाग के रिपोर्ट के मुताबिक जिले में दूध उत्पादन से ज्यादा खपत है। ऐसे में शुद्धता की गारंटी होना संभव नहीं है। यही हाल पनीर और दूध से बने खाद्य पदार्थों का भी है।
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दो साल में 67 रिपोर्ट आई, सभी फेल
बीते वित्तीय साल और चालू सत्र में अब तक 67 रिपोर्ट प्राप्त हुई। इसमें सभी की रिपोर्ट फेल हुई। इसमें पनीर, खोआ, नमकीन, बेसन, लड्डू, बर्फी आदि खाद्य पदार्थ शामिल हैं। कई में हानिकारण रंग, रसायन जबकि कई अधोमानक की श्रेणी में थे। ऐसे व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए रिपोर्ट एओ कोर्ट में भेज दी गई है।