जिला महिला चिकित्सालय में बिना मास्क के बैठी मरीजों के साथ आई महिलाएं।
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महिला अस्पताल में कोरोना के अधिक मरीज आए तो रेफर ही चारा
सीएमएस बोलीं- नॉन कोविड अस्पताल के बावजूद दो केस लेंगे
बस्ती। महिला अस्पताल में रोज करीब 100 से 150 गर्भवती महिलाएं भर्ती होती हैं। इनमें से गंभीर मरीजों रेफर कर दिया जाता है। अब कोरोना के नए स्वरूप ओमिक्रॉन ने दस्तक दे दी है तो सरकार और प्रशासन इसे लेकर संवेदनशील हो गया है। अस्पतालों में कोरोना से निपटने के लिए तैयारी तेज कर दी गई है। ऐसे में महिला अस्पताल में दो बेड कोरोना मरीज के लिए तैयार किया गया है।
इन बेडों पर संसाधन के नाम पर मात्र ग्लूकोज चढ़ाने में प्रयोग आने वाला लोहे का राड के अलावा कुछ भी नहीं है। चार डॉक्टरों की तैनाती है। इनमें दो संविदा के हैं। यही हाल पैरा मेडिकल स्टॉफ का है। 30 के सापेक्ष 21 पैरा मेडिकल स्टाफ तैनात हैं। जिम्मेदार कहते हैं कि उनका अस्पताल नान कोविड है। वे कोविड मरीजों को भर्ती ही क्यों करेंगे।
सीएमएस डॉ. सुषमा सिन्हा ने कहा कि महिला अस्पताल में कोरोना मरीजों के लिए दो बेड आरक्षित हैं। प्राइवेट वार्ड में यह बेड लगाए जाएंगे। फिलहाल वहां दूसरे मरीजों को भर्ती किया जाता है। उन्होंने बताया कि कोरोना के लिए अलग से दवा नहीं आई है। बुखार व अन्य सामान्य बीमारियों की दवाएं दी जाती हैं। उन्होंने बताया कि डॉक्टर और पैरा मेडिकल स्टॉफ की कमी है। दो से अधिक कोरोना पीड़ित गर्भवती महिलाएं आईं तो उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाएगा। जिन दो बेडों पर कोरोना मरीजों को भर्ती किया जाएगा, उनकी निगरानी के लिए संसाधनों की व्यवस्था कर ली जाएगी। वेंटिलेटर और ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी तो रेफर के अलावा कोई विकल्प नहीं है।