दुबौलिया में लाइन निर्माण का निरीक्षण करते मुख्य अभियंता और एसई।
बस्ती। विद्युत वितरण मंडल के मुख्य अभियंता इं. विजय कुमार गुप्ता एवं अधीक्षण अभियंता रणजीत चौधरी ने शुक्रवार को उपकेंद्रों का निरीक्षण किया। दुबौलिया उपकेंद्र पर 33 केवी लाइन निर्माण में ढिलाई पर मुख्य अभियंता ने नाराजगी जताई। ठेकेदारों को अतिशीघ्र लाइन निर्माण का कार्य पूर्ण करके आपूर्ति सुनिश्चित करने की हिदायत दी।
उन्होंने निर्माण खंड के अभियंताओं को लाइन निर्माण कार्यों का नियमित अनुरक्षण व कार्य की गुणवत्ता परखने के लिए निर्देशित किया। लापरवाही पर तत्काल कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि लाइन निर्माण में लेटलतीफी के लिए ठेकेदार के साथ अधिकारी भी जवाबदेह होंगे। एसई ने एकडेंगवा और दुबौलिया उपकेंद्र के निरीक्षण के दौरान निर्देशित किया कि समय- समय पर तकनीकी टीम बुलाकर उपकेंद्रों का परीक्षण कराया जाए। उपकेंद्र से जुड़े फीडर पर लोड चेक किया जाए। इसके लिए परीक्षण विभाग से ट्रांसफार्मरों में मीटर भी लगाया जाए। खबर है कि पिछले दिनों जिन दागी ठेकेदारों फर्जी दस्तावेजों पर टेंडर आवंटित हो गए थे अधिकारी उन कार्यों को आनन- फानन में पूर्ण कराने को लेकर सजग हो गए हैं। दुबौलिया उपकेंद्र से जुड़ी 33 केवी लाइन का निर्माण अधूरा पाया गया है। ट्रांसफार्मर भी नहीं लगाए गए हैं। मुख्य अभियंता और एसई ने नाराजगी जताई है। निर्देश दिए गए कि लाइन निर्माण का कार्य हर हाल में पूर्ण होना चाहिए। लापरवाही बरतने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
अभी काली सूची में नहीं शामिल हुए दागी ठेकेदार
विद्युत निगम में फर्जी प्रपत्रों के जरिये ठेका हथियाने वाले ठेकेदारों पर अभी ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। जानकार बता रहे हैं कि निगम ने अभी केवल कारण बताओ नोटिस जारी किया है। ठेकेदारों ने जवाब के रूप में अद्यतन प्रपत्र जमा कर दिए हैं। उसमें त्रुटियां संशाेधित बताई जा रही हैं। जिन ठेकेदारों के प्रपत्र जांच फर्जी पाए गए हैंए उनके नाम कई टेंडर पूर्व से ही आवंटित हैं। लाइन निर्माण एवं ट्रांसफार्मर स्थापना का कार्य निर्माणाधीन है। बाहर का रास्ता दिखाने पर निगम के ये कार्य लटक सकते हैं। खबर है कि दागी ठेकेदारों में से कुछ लोगों को वितरण खंड में फिर नए कार्य आवंटित कर दिए गए हैं। रसूखदार ठेकेदारों पर कार्रवाई से अधिकारी भी पीछे हट रहे हैं। बताया जा रहा है कि फर्जी दस्तावेज पर लंबे समय से टेंडर हथियाने वाले ठेकेदारों की मदद में निगम के कुछ जिम्मेदार भी संलिप्त हैं। लेकिन, संबंधित विभाग से ही प्रकरण की जांच होने के नाते आरोपी बच जा रहे हैं। अंदरखाने से मिली जानकारी के अनुसार इन दागी ठेकेदारों की भुगतान की प्रक्रिया भी गुपचुप ढंग से चल रही है।