रोडवेज बस में नहीं दिखा फायर यंत्र व दवा किट संवाद
बस्ती। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम यात्रियों को सुरक्षित और सुविधाजनक सफर का दावा करता है, लेकिन हकीकत इससे इतर है। रोडवेज बसों में न तो प्राथमिक उपचार की समुचित व्यवस्था है और न ही आग से बचाव के इंतजाम हैं। कई बसों में फर्स्ट एड बॉक्स खाली या टूटे मिले, जबकि अग्निशमन यंत्र गायब या निष्प्रयोज मिले।
संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने बुधवार को बस्ती डिपो से संचालित कई बसों की पड़ताल की। अधिकतर बसों में फर्स्ट एड बॉक्स तो लगे मिले, लेकिन उनमें दवाएं और प्राथमिक उपचार की सामग्री नहीं थी। कुछ बसों में बॉक्स टूटे हुए थे, जबकि कई में पूरी तरह गायब मिले।
डिपो से रोजाना 54 से 57 निगम और 38 अनुबंधित बसें विभिन्न रूटों पर संचालित होती हैं। इन बसों से रोजाना करीब 14 से 15 हजार यात्री सफर करते हैं। बावजूद इसके सुरक्षा मानकों की अनदेखी यात्रियों की चिंता बढ़ा रही है। पड़ताल में यह भी सामने आया कि कई बसों में लगे अग्निशमन यंत्र जंग खा चुके हैं या समय पर रिफिल नहीं कराए गए।
कुछ बसों में चालक और परिचालक ने फायर यंत्र सीट के नीचे रख छोड़े थे, जिससे आपात स्थिति में उनका तुरंत उपयोग करना मुश्किल हो सकता है। हाल ही में गोरखपुर-बस्ती फोरलेन पर टोल प्लाजा के पास चारबाग डिपो की एक रोडवेज बस में आग लगने की घटना के बाद भी सुरक्षा व्यवस्थाओं में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है। उस हादसे में सभी यात्री सुरक्षित बच गए थे, लेकिन बस पूरी तरह जल गई थी।
आग या हादसा हुआ तो मुश्किल बढ़ेगी : बस में आग लगने या किसी यात्री की तबीयत बिगड़ने पर तत्काल राहत मिलना आसान नहीं होगा। कई बसों में न ओआरएस उपलब्ध है और न ही सामान्य दवाएं। चालक-परिचालकों का कहना है कि विभाग की ओर से सामग्री उपलब्ध नहीं कराई जाती। अफसर भले ही दावा करें कि सारे इंतजाम परिचालक के पास है लेकिन परिचालक-चालक को भी इसकी खबर नहीं है।