बस्ती। मौसम में बदलाव के साथ वायरल बुखार और डायरिया का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। जिला अस्पताल के पीआईसीयू में झटके के साथ तेज बुखार से पीड़ित तीन बच्चों समेत आठ बच्चे भर्ती हैं। वहीं, चिल्ड्रेन वार्ड में करीब 30 बच्चों का इलाज चल रहा है। इनमें बुखार और दस्त से पीड़ित बच्चे शामिल हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीएस पटेल ने बताया कि बुखार से पीड़ित बच्चों की प्रारंभिक जांच कराई जा रही है। हाईग्रेड फीवर (एचजीएफ) की पुष्टि होने पर उन्हें पीआईसीयू में भर्ती किया जा रहा है। ऐसे बच्चों में एईएस की आशंका को देखते हुए जांच के लिए नमूने भी लिए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण बच्चों में मौसमी बीमारियां बढ़ी हैं। गर्मी और उमस के साथ दूषित खानपान भी बच्चों के बीमार पड़ने का कारण बन रहा है। अभिभावकों को बच्चों की विशेष देखभाल करने, पौष्टिक आहार देने और मच्छरों से बचाव की सलाह दी जा रही है। छोटे बच्चों को प्लास्टिक की बोतल से दूध न पिलाने की भी सलाह दी गई है।
फिजिशियन डॉ. एसडी ओझा के अनुसार, कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में वायरल संक्रमण तेजी से असर कर रहा है। यह बदलते मौसम का प्रभाव है। बुधवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में 975 मरीजों ने परामर्श लिया। सबसे अधिक भीड़ बाल रोग विभाग में रही, जहां 196 बच्चों को चिकित्सकीय परामर्श दिया गया। इनमें से 10 बच्चों को भर्ती किया गया। भर्ती बच्चों में वायरल बुखार और दस्त के अलावा अन्य समस्याओं से पीड़ित बच्चे शामिल हैं।
तेज बुखार के 150 से अधिक मरीज
जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में अब तक 150 से अधिक बच्चों को हाईग्रेड फीवर की श्रेणी में चिह्नित कर भर्ती कराया जा चुका है। इनमें से अधिकांश बच्चे उपचार के बाद स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। चिकित्सकों के अनुसार फिलहाल मौसमी बीमारियों का प्रकोप है। गंदगी और दूषित खानपान के कारण बुखार और दस्त के मामले बढ़ रहे हैं। अब तक चार बच्चों में एईएस की पुष्टि हो चुकी है।
ब्लड जांच केंद्र पर बढ़ी भीड़
जिला अस्पताल के ब्लड जांच केंद्र में इन दिनों रोजाना करीब 250 से 300 मरीजों की जांच हो रही है। केंद्र प्रभारी के अनुसार डेंगू, मलेरिया, हाईग्रेड फीवर, जेई-एईएस समेत अन्य जांचें कराई जा रही हैं। मरीजों की संख्या बढ़ने से जांच केंद्र पर कतार लग रही है। जांच में दो से चार घंटे तक का समय लग रहा है।
कोट
चिकित्सकों को समय से ओपीडी में बैठने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि मरीजों को किसी तरह की असुविधा न हो। अस्पताल में दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता है।
-डॉ. अनिल कुमार, एसआईसी, जिला अस्पताल, बस्ती।