बस्ती। लोक आस्था का महापर्व छठ शनिवार को नहाय खाय के साथ प्रारंभ हो जाएगा। घर से लेकर घाट तक तैयारियां अंतिम चरण में हैं। नदियों, सरोवरों के घाट संवरने लगे हैं। साफ-सफाई के साथ पूजा की वेदी बनाई जा रही है।
बाजार एक दिन पहले ही सज गया है। छठ मइया से सुख, शांति, समृद्धि, संतान का आशीर्वाद मांगने परदेसी भी घर आ गए हैं। छठ पूजा के लिए किस्म-किस्म की तैयारी है। घर-आंगन सब साफ किए जा रहे है। अटूट श्रद्धा के साथ व्रती 25 अक्तूबर शनिवार को नहाय खाय के साथ पूजा का विधान आरंभ कर देंगे।
धर्माचार्य बताते हैंं कि छठ महापर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी के दिन मनाया जाता है। चार दिवसीय यह उत्सव 25 से प्रारंभ होकर 28 अक्तूबर की सुबह सूर्योदय के बाद संपन्न होगा। संतान की प्राप्ति, मंगल जीवन एवं दीर्घायु की कामना लिए सुहागिन महिलाएं पहले दिन नहाय-खाय के साथ यह पूजा शुरू करेंगी।
इसमें शुभ-लाभ के लिए घर की महिलाओं का साथ पूरे परिवार के लोग मिलकर अटूटा आस्था एवं श्रद्धा के साथ देते हैं। पहले दिन से घर-घर छठी मइया की महिमा का बखान शुरू हो जाएगा। दूसरे दिन व्रती खरना करेंगे। इस दिन स्वच्छता के साथ घरों में गुड़-चावल की खीर बनती है। इसी से खरना कर 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाएगा।
तीसरे दिन 27 अक्तूबर रविवार की शाम नदियों, सरोवरों के किनारे अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। घाट-घाट पूरी रात उत्सव जैसा माहौल रहेगा। अगले दिन भोर में उगते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पण के साथ यह पर्व संपन्न हो जाएगा।
पहले दिन शनिवार को नहाय-खाय ः छठ महापर्व में नहाय-खाय शनिवार को होगा। इस दिन श्रद्धालु साफ सफाई कर स्नान के बाद नए वस्त्र धारण करेंगे। सात्विक भोजन ग्रहण किया जाएगा। इस दिन व्रती के भोजन ग्रहण करने के बाद ही घर के बाकी सदस्य भोजन ग्रहण करते हैं। इसके बाद पवित्र भाव से सभी छठ मइया की आराधना में लीन हो जाते हैं।
दूसरे दिन होगा खरना का विधान ः छठ पूजा के दूसरे दिन रविवार को खरना का विधान पूरा किया जाएगा। खरना के दिन व्रती एक समय मीठा भोजन करते हैं। इस दिन गुड़ से बनी चावल की खीर खाई जाती है। बाद में यह प्रसाद के रूप में परिवार के सभी सदस्य ग्रहण करते हैं। इसके उपरांत 36 घंटे का निर्जला व्रत प्रारंभ हो जाता है।
तीसरे दिन सांध्य अर्घ्य देंगी महिलाएं ः तीसरे दिन सोमवार 27 अक्तूबर को पूजा अपनी भव्यता को छूने लगती है। यह पूजा का विशेष दिन होता है। इस दिन शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को पानी में घुसकर अर्घ्य दिया जाता है और सूर्य देव की विधिवत पूजा की जाती है।
रात में छठी मैया के मंगल गीत गाए जाते हैं। व्रत की कथा सुनी जाती है। अर्घ्य के लिए ठेकुआ, चावल के लड्डू जैसी कई मिठाइयां बनाई जा रही हैं। मिठाइयों और फलों को टोकरी या सूप में सजाया जाता है।
चौथा दिन सुबह का अर्घ ः28 अक्तूबर चौथा दिन मंगलवार को छठ पूजा का आखिरी दिन होगा। इस दिन व्रती महिलाएं सूर्योदय से पहले नदी-तालाबों के घाटों पर पहुंचती हैं और उगते हुए सूर्य को कच्चे दूध में गंगा जल मिलाकर अर्घ्य देती हैं। इस दिन व्रत का पारण होता है, इसके साथ ही छठ पूजा का समापन होता है।