दिव्यांग बच्चों के लिए गुणात्मक शिक्षा के बंद द्वार खुल गए हैं। अब सभी केंद्रीय विद्यालय और सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों को अनिवार्य रूप से उन्हें शिक्षा देनी होगी। यह जानकारी देेते हुए विकलांगता पुनर्वास विशेषज्ञ अमरेश चन्द्रा ने यहां बताया कि लंबे संघर्ष के बाद यह सफलता मिली है।
उन्होंने बताया कि सीबीएसई के संयुक्त सचिव डीटी सुदर्शन राव ने इस संबंध में निर्देश जारी किया है। इसके अनुसार देश के सभी केंद्रीय विद्यालय, सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों में दिव्यांगों को अनिवार्य रूप से शिक्षा देनी होगी। इसके लिए विशेष अध्यापक नियुक्त किए जाएंगे। मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी की पहल की सराहना करते हुए अमरेश चंद्रा ने कहा कि लंबे अरसे से दिव्यांगों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए अनेक संगठन डॉ. इंदुमती राव के नेतृत्व में संघर्ष कर रहे थे।
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने इसे गंभीरता से लिया। कहा कि निर्देशों के अनुरूप अब स्कूलों में विकलांग बच्चों के लिए सहायक उपकरण के साथ ही उनके आवागमन एवं शैक्षणिक पद्धति को विशेष बच्चों हेतु परिवर्तित करना होगा। विद्यालयों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि 2020 तक सीबीएसई बोर्ड के सभी विद्यालय, छात्रावास, पुस्तकालय, व प्रयोगशालाएं आदि बाधा मुक्त होने के साथ ही विकलांग बच्चों के अनुरूप हों।
केंद्र सरकार और सीबीएसई बोर्ड की इस पहल का श्रवण बाधित विशेषज्ञ डॉ. सोनल कौशिक, पुनर्वास विशेषज्ञ गोपीनाथ सोनी, सुशील कुमार यादव, विशेष शिक्षक संघ की नीलम वर्मा, अर्चना सिंह आदि ने प्रसन्नता व्यक्त की है।