बस्ती। छोटे भूखंडों पर मकान बनाने के लिए नक्शा स्वीकृत कराने और प्राधिकरण का चक्कर लगाने निजात मिलने जा रही है। बस्ती विकास प्राधिकरण (बीडीए) क्षेत्र में उत्तर प्रदेश भवन निर्माण एवं विकास उपविधि-2025 और आदर्श जोनिंग रेगुलेशन-2025 के प्रावधानों के तहत भवन निर्माण की प्रक्रिया सरल की गई है। 100 वर्गमीटर तक के भूखंड अब ऑनलाइन आवेदन के बाद स्वत: नक्शा पास हो जाएगा। इससे लोगों को भाग-दौड़ से राहत मिलेगी। साथ ही अवैध प्लॉटिंग पर रोक लगेगी।
नई व्यवस्था में निर्धारित शर्तें पूरी करने पर छोटे आवासीय भवनों के लिए नक्शा स्वीकृति की अनिवार्यता में छूट और बड़े भूखंडों के नक्शों के त्वरित निस्तारण का प्रावधान है। हालांकि, निर्माणकर्ताओं को ऑनलाइन पंजीकरण, निर्धारित शुल्क, भवन उपविधियों और भू-उपयोग संबंधी नियमों का पालन करना होगा। बीडीए सचिव कीर्ति प्रकाश भारती के अनुसार, महायोजना-2031 के तहत स्वीकृत कॉलोनियों के भूखंडों पर भवन निर्माण के लिए अलग से अनुमति लेने के बजाय एक रुपये की टोकन राशि देकर पंजीकरण कराने की व्यवस्था की गई है।
100 वर्गमीटर तक के आवासीय भवनों और 30 वर्गमीटर तक के वाणिज्यिक भवनों के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत ऑनलाइन आवेदन, आवश्यक दस्तावेज और शुल्क जमा करना होगा। वहीं, 500 वर्गमीटर तक के आवासीय और 200 वर्गमीटर तक के वाणिज्यिक भवनों के नक्शों को तत्काल स्वीकृत करने का प्रावधान है। तीन पास ले-आउट में ढाई से तीन सौ मकान बन सकेंगे। वहीं, तीन ले-आउट की मंजूरी मिलने के बाद आसानी से लोग घर बनवा सकेंगे।
पंजीकरण के साथ नियमों का पालन जरूरी
नई व्यवस्था का लाभ लेने के लिए निर्माणकर्ताओं को प्राधिकरण के पोर्टल map.up.gov.in पर पंजीकरण कराना होगा। निर्धारित श्रेणियों में पंजीकृत आर्किटेक्ट से नक्शा तैयार कराकर आवश्यक दस्तावेज और शुल्क जमा करने होंगे। नक्शा भवन उपविधियों, भूमि के निर्धारित उपयोग और अन्य मानकों के अनुरूप होना चाहिए। प्राधिकरण की ओर से आवंटित या स्वीकृत भूखंडों पर निर्धारित शर्तें पूरी होने पर ही संबंधित छूट का लाभ मिलेगा। महायोजना-2031 में आवासीय उपयोग के लिए चिह्नित क्षेत्रों में 300 वर्गमीटर तक के व्यक्तिगत आवासीय भवनों के नक्शे स्वचालित रूप से स्वीकृत करने का भी प्रावधान बताया गया है। इसके लिए भवन के सामने कम से कम नौ मीटर चौड़ी सड़क सहित निर्धारित मानकों को पूरा करना होगा। ऑनलाइन आवेदन के बाद नक्शा स्वीकृति के लिए 21 दिन की समयसीमा और स्वीकृति के बाद शुल्क जमा करने के लिए 30 दिन का प्रावधान भी बताया गया है। निर्धारित अवधि में शुल्क जमा नहीं करने पर आवेदन स्वत: निरस्त हो सकता है।
अवैध प्लॉटिंग पर लगेगी रोक
बीडीए सचिव के अनुसार, प्राधिकरण के दायरे में बस्ती शहर के अलावा 217 गांव शामिल हैं। प्राधिकरण का क्षेत्रफल करीब 151 वर्ग किलोमीटर है। नई व्यवस्था में महायोजना-2031 के निर्धारित भू-उपयोग और भवन उपविधि-2025 के मानकों के अनुसार कॉलोनियों की प्लॉटिंग के मानचित्र का अनुमोदन अनिवार्य होगा। इससे अवैध कॉलोनियों पर अंकुश लगाने और सड़क, नाली, सीवर तथा बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ नियोजित विकास को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
गलत जानकारी देने पर रद होगी मंजूरी
प्रभारी एक्सईएन बीडीए अंकुर वर्मा ने बताया कि नियमों में राहत के साथ निर्माणकर्ताओं की जवाबदेही भी तय की गई है। स्व-प्रमाणन या नक्शे में दी गई जानकारी गलत मिलने अथवा भवन मानकों का उल्लंघन होने पर प्राधिकरण मंजूरी निरस्त कर सकता है। नियमों के उल्लंघन पर निर्धारित समयसीमा के भीतर ही नहीं, बाद में भी कार्रवाई की जा सकेगी। गलत स्व-घोषणा पाए जाने पर भवन मालिक, आवेदक और पंजीकृत आर्किटेक्ट के खिलाफ भी कार्रवाई का प्रावधान है।
छोटे भूखंडों के आवंटियों को होगा फायदा
शहर में फिलहाल तीन स्वीकृत ले-आउट हैं, जबकि तीन अन्य स्वीकृति की प्रक्रिया में हैं। अभी भवन निर्माण से पहले नक्शा स्वीकृत कराने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता है। नियोजन विभाग के स्तर पर जांच और आपत्तियों के कारण प्रक्रिया लंबी खिंचने पर आवंटियों को परेशानी होती है। नई व्यवस्था से निर्धारित मानकों के अनुरूप निर्माण करने वालों का समय और खर्च बचेगा। साथ ही, भवन निर्माण में पारदर्शिता बढ़ने और शहर के विस्तार वाले क्षेत्रों में व्यवस्थित विकास को गति मिलने की उम्मीद है।