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बदलते मौसम में बच्चों की सेहत के लिए रहें सावधान

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जिला अस्पताल के ओपीडी के बाहर डाक्टर का इंतजार करते मरीज। - फोटो : BASTI
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बदलते मौसम में बच्चों की सेहत के लिए रहें सावधान
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जिला अस्पताल की ओपीडी में मौसमी बीमारियों से ग्रस्त मरीजों की बढ़ी तादाद
बीमारियों की चपेट में आने वाले सर्वाधिक बच्चे, 40 फीसदी तक बढ़े मरीज
बस्ती। दिन में तेज धूप और बारिश होते ही तापमान का कम हो जाना, मौसम का यह उतार-चढ़ाव सेहत का दुश्मन बन रहा है। इस वातावरण में जीवाणु-विषाणु के साथ मच्छरों का भी प्रकोप बढ़ गया है। नतीजतन अस्पतालों की ओपीडी में सर्दी, जुकाम, बुखार के मरीजों की संख्या में 40 फीसदी तक का इजाफा हो गया है। सर्दी-जुकाम के शिकार बच्चे निमोनिया के भी शिकार हो रहे हैं।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार जिले में दिन में पारा 32 से 33 डिग्री तक पहुंच रहा है। जबकि रात में 24 से 25 डिग्री नीचे चला जा रहा है। मौसम के इस उतार-चढ़ाव से सबसे ज्यादा दिक्कत बच्चों को हो रही है। इन दिनों वायरल फीवर, टायफायड, फ्लू के अलावा मलेरिया जैसे मच्छर जनित बीमारियों का प्रकोप बढ़ने लगा है। जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. आलोक प्रसाद ने बताया आम दिनों में ओपीडी में 100 के करीब मरीज आते थे, लेकिन अब यह आंकड़ा 140 तक पहुंच गया है। ज्यादातर मरीज खांसी, बुखार व अन्य मौसमी बीमारियों के आ रहे हैं।
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विभागीय जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल में छह, ओपेक चिकित्सालय कैली में पांच, महिला अस्पताल में संविदा सहित पांच के अलावा छह बाल रोग विशेषज्ञ सीएमओ के अधीन कार्यरत हैं। इसके अलावा14 बाल रोग विशेषज्ञ निजी तौर पर अस्पताल अथवा नर्सिंग होम में प्रेक्टिस करते हैं, यानी जिले में कुल 36 बाल रोग विशेषज्ञ हैं। विशेषज्ञ चिकित्सक के लिए कोई मानक तय नहीं हैं, मगर तीस हजार की आबादी पर एक एमबीबीएस चिकित्सक की तैनाती होनी चाहिए।
10 हजार बच्चों पर एक बाल रोग विशेषज्ञ
बस्ती। मौसमी बीमारियों के सिर उठाने के बीच कोरोना की तीसरी लहर का खतरा भी टला नहीं है। इन सबके बीच बाल रोग विशेषज्ञों की कमी व्यवस्था में खलल डाल रही है। जिले में निजी व सरकारी अस्पताल मिलाकर 36 बाल रोग विशेषज्ञ हैं। जबकि शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों की संख्या स्वास्थ्य विभाग के रिपोर्ट के अनुसार जिले में 3.66 लाख है। इस अनुसार प्रत्येक डॉक्टर पर दस हजार बच्चों के इलाज का जिम्मा है।
इन बातों का रखें ख्याल
पूरी बांह का कपड़ा पहनकर घर से बाहर निकलें, रात में खुले में न सोएं, मच्छरदानी जरूर लगाएं, सुपाच्य भोजन का सेवन करें, अधिक पानी पीएं, एसी में सोने और फ्रीज का पानी पीने से परहेज करें, मौसमी फल और हरी सब्जियों का सेवन करें, सर्दी, खांसी, बुखार आदि आने पर तुरंत अस्पताल जाएं।
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वायरल मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सीएचसी-पीएचसी तक को अलर्ट किया गया है। लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि बदलते मौसम में सावधानी बरतें।
डॉ. अनूप कुमार, सीएमओ
इस मौसम में बच्चों की सेहत का पूरा ख्याल रखें। बदलते मौसम में बच्चों में निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों को पूरी बांह का कपड़ा पहनाएं और खानपान पर विशेष ध्यान दें।
- डॉ. सरफराज, बाल रोग विशेषज्ञ
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