38 हजार वाहनों पर एक जांच केंद्र, प्रदूषित हो रहा बस्ती
- मौजूदा समय में बस्ती में हैं कुल 385173 छोटे-बड़े पंजीकृत वाहन
- वायु प्रदूषण जांचने के दस केंद्र, ध्वनि प्रदूषण मापने के एक भी नहीं
- अप्रैल से अब तक हो चुकी 57 हजार 382 वाहनों की जांच
- 234 वाहनों पर कार्रवाई कर वसूले जा चुके हैं 2.34 लाख रुपये
- ट्रैफिक पुलिस के डेसिबल मशीन से चल रही मॉडिफाइड साइलेंसर की जांच
- 80 वाहनों की ध्वनि प्रदूषण जांच में वसूले जा चुके हैं तकरीबन डेढ़ लाख रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बस्ती में परिवहन विभाग के पास केवल दस वायु प्रदूषण जांच केंद्र हैं। जब जिले में कुल पंजीकृत वाहनों की संख्या 3 लाख 85 हजार 172 हैं। ऐसे में 38172 वाहनों पर एक वायु प्रदूषण जांच केंद्र है। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रशासन प्रदूषण को लेकर कितना गंभीर है। यही नहीं जिले में ध्वनि मापने का केंद्र एक भी नहीं है और न ही परिवहन विभाग के पास ध्वनि मापने का कोई मशीन ही उपलब्ध है।
यातायात पुलिस के सहयोग से जांच कच्छप गति से चल रही है और पूरा जिला ध्वनि व वायु प्रदूषण से जूझ रहा है। हाईकोर्ट के निर्देश पर जिले में वाहनों की ध्वनि प्रदूषण की जांच कुछ दिन चली तो यातायात पुलिस ने अपने डेसिबल मशीन से कुल 70 बुलेट गाड़ियों की जांच की और एक हजार रुपये प्रति गाड़ी के हिसाब से 70 हजार रुपये वसूला। यातायात उपनिरीक्षक कामेश्वर सिंह के अनुसार लगातार जांच प्रक्रिया चल रही है। वहीं, परिवहन विभाग के एआरटीओ अरुण प्रकाश चौबे की टीम ने कुल आठ बुलेट गाड़ियों को मॉडीफाइड साइलेंस लगाने के आरोप में दस हजार प्रति वाहन की दर से 80 हजार रुपये वसूल किए। उसके बाद से जांच धीमी हो गई है। जबकि एआरटीओ अरुण प्रकाश चौबे के अनुसार मुख्यालय को डेसिबल मशीन उपलब्ध कराने के लिए अनुरोध किया गया है। अप्रैल से लेकर अब तक कुल 57 हजार 282 वाहनों के प्रदूषण की जांच की गई और 234 वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की गई। इनसे 2 लाख 34 हजार रुपये भी वसूले गए। सवाल यह उठता है कि जब एक केंद्र के जिम्मे तकरीबन 38 हजार वाहनों के प्रदूषण की जांच है तो सभी वाहनों को अगर प्रदूषण मुक्त करना क्या विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है। दूसरी तरफ परिवहन विभाग के संभागीय प्राविधिक निरीक्षक संजय कुमार दास ने बताया कि सभी प्रदूषण जांच केंद्रों की नियमित जांच की जाती है और उनकी संख्या बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। प्रदूषण प्रमाणपत्र छह माह के लिए ही वैध होता है। वैधता समाप्त होने के बाद प्रवर्तन की कार्रवाई होने पर दस हजार रुपये का अर्थदंड लगाने का प्रावधान है।