- पुलिस को सौंपे दवाओं के छह पत्ते, अयोध्या मेडिकल कॉलेज से बेटे यश को मिली छुट्टी
- परशुरामपुर थाना क्षेत्र के रजवापुर गांव का मामला
बस्ती। परशुरामपुर क्षेत्र के रजवापुर गांव की रेशमा ने पति से विवाद के बाद खुन्नस में अपने बेटा-बेटी को मौत के घाट उतारने के लिए नींद की गोलियां खिलाईं थी। ओवरडोज होने पर नौ साल की गुड़िया ने शनिवार को ही दम तोड़ दिया था। सात वर्ष के बेटे यश का मेडिकल कॉलेज अयोध्या में तीन दिन तक इलाज चला और उसकी जान बच गई। बुधवार को उसके पिता पवन उसे अस्पताल से छुट्टी करवाकर घर ले आया।
पवन ने बताया कि उसकी पत्नी रेशमा हर हफ्ते अपने मायके जाती थी। वहां कोई उसे नींद की गोलियां देता है। पवन के अनुसार घर आने के बाद उसे नींद की गोलियों के छह पत्ते मिले हैं। वह सारे उसने पुलिस को सौंप दिए हैं। उसने बताया कि एसओ से मांग की कि वे दवाएं रेशमा को कौन दे रहा था, इसकी जांच करके उसे भी केस में शामिल किया जाए।
एसओ भानु प्रताप सिंह ने बताया कि इस विंदु पर छानबीन की जा रही है। दवा मुहैया कराने वाले के बारे में जानकारी हासिल की जा रही है।
नहीं करती थी देखभाल
पति पवन ने बताया कि रेशमा भी नींद की गोलियां खाकर घर में सोई रहती थी। बच्चों की देखभाल भी ढंग से नहीं करती थी। पवन से पूछताछ के आधार पर विवेचक ने बताया कि इसी वजह से पवन एक साल से मुंबई से घर नहीं आया था। मगर मोबाइल फोन पर बात करते-करते वह लड़ने लगती थी। उस दिन भी रुपये भेजने के लिए वह जिद कर रही थी। उसने अपनी मजबूरी बताई तो कहने लगी कि बच्चों को जहर देकर खुद भी मर जाएगी। आरोप है कि उसी के बाद उसने बच्चों को खाने में नींद की दवा मिलाकर परोस दिया।
यह है मामला
रजवापुर निवासी पवन काम के सिलसिले में मुंबई में रहता है। उसकी पत्नी रेशमा नौ साल की बेटी गुड़िया और छह वर्ष के बेटे यश उर्फ शिवलाल को लेकर गांव में रहती थी। पुलिस के मुताबिक इस बीच किसी बात को लेकर फिर उनमें विवाद हो गया। आरोप है कि तैश में आकर रेशमा ने शनिवार को सुबह खाने में जहर दे दिया। पति ने तहरीर में बताया है कि दोनों बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी तो उनके बड़े भाई राम औतार इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अयोध्या ले गए, जहां इलाज के दौरान बेटी गुड़िया की उसी दिन मृत्यु हो गई। रेशमा पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज कर पुलिस उसे जेल भेज चुकी है।