बहादुरपुर। सावन में जेठ जैसी तपिश ने लोगों को बेहाल कर दिया है। किसानों मौसम की बेरुखी से परेशान हैं। धान और गन्ने की फसलों की सिंचाई करनी पड़ रही है। बारिश न होने के कारण किसानों को अपनी फसल बचाने के लिए पंपसेट सहारा लेना पड़ रहा है।
बरसात न होने के कारण किसानों के चेहरे पर चिंता साफ दिखाई दे रही है। किसान रमेश चन्द्र चौधरी, शत्रुघ्न पांडेय, रामगोपाल दुबे, बाबूराम चौबे, राजमणि चतुर्वेदी, हरिहर, राजबली, रामसंवारे, रामदास चौधरी आदि ने बताया कि वर्ष 2005-06 में सिंचाई विभाग ने रोहीपुर, रसोइया, भैंसहटी, करमी बुजुर्ग, मकदूमपुर, खरिका भारी तक कम्हरिया माइनर का निर्माण कराया था।
इसी माइन से भैंसहटी गांव के पास से फेटवा, दौलतचक, खखोड़ा, गौरिया, बबुरहिया, खलीलपट्टी होते हुए सेमरा तक को जोड़ा गया था। इसके बाद से ही अब तक कभी भी फेटवा के आगे पानी नहीं पंहुचा। फेटवा के आगे के गांवों की जमीन ऊंची है।