आरोपी निलंबित नायब तहसीलदार घनश्याम शुक्ला की भूमिका भी पुलिस की नजर में उतनी पाक-साफ नहीं है, जितनी की विशाखा कमेटी की पूछताछ में उसने बयान दिया है। पुलिस का मानना है कि एक प्रशासनिक अधिकारी के घर में मारपीट की जानकारी होने के बावजूद आखिर आरोपी ने पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी। इसे भी मामले का एक अहम पहलू बताया जा रहा है।
साेमवार को डीएम स्तर से विशाखा कमेटी की सिफारिशों के आधार पर गठित तीन महिला अधिकारियों की जांच कमेटी ने रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि पीड़िता महिला अधिकारी के आवास पर उस वक्त तीसरे व्यक्ति की मौजूदगी की बात सामने आ रही है। एडिशनल एसपी दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि विवेचना चल रही है। सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है।
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दबिश के बाद भी पुलिस के हाथ खाली
महिला अधिकारी के साथ हुई घटना में ढुलमुल रवैया अपना रही पुलिस ने मामले को शासन के संज्ञान में लेते ही हरकत में आ गई। मगर, तब तक देर हो चुकी थी। न्यायालय से गैर जमानती वारंट जारी कराने के साथ गिरफ्तारी के लिए छह टीमों को लगाया गया। लेकिन बुधवार को भी पुलिस के हाथ आरोपी नायब तहसीलदार नहीं लगा। पुलिस का कहना है कि बस्ती, गोरखपुर व महराजगंज में संभावित स्थानों पर दबिश दी गई।
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सियासी दखलंदाजी से बचना चाहती है पुलिस
मामले में पुलिस सियासी दखलंदाजी से बचकर विवेचना कर रही है। यहां तक कि विवेचना कर रही टीम को मीडिया से दूर रखा जा रहा है। सूत्रों की मानें तो प्रकरण शासन के संज्ञान में होने के कारण पुलिस फूंक-फूंक कर कदम रख रही है।