दो चिकित्सक फिर भी नर्स के भरोसे सीएचसी की चिकित्सा व्यवस्था
- चिकित्सक की गैर मौजूदगी में नर्स करती है इलाज
- शासन कि नीतियां ताक पर, निर्धारित समय से नहीं आते चिकित्सक
कमलेंद्र पटेल
भानपुर। एक तरफ जहां सरकार प्रदेश भर में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने का हर संभव प्रयास कर रही है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के कर्मी शासन कि मंशा पर पानी फेर रहे हैं। सोमवार को अमर उजाला कि टीम ने सीएचसी को कैमरे से देखा।
सुबह आठ बजे पहुंची टीम को दस बजे तक यहां शासन के निर्देशों की धज्जियां उड़ती दिखी। सुबह आठ बजे से संचालित अस्पताल में दस बजे दिन तक सीएचसी अधीक्षक डॉ. एसके चौधरी ही नहीं पहुंचे थे। इनकी ओपीडी कक्ष के बाहर मरीजों की भीड़ थी, मगर वह दस बजे तक अस्पताल नहीं पहुंचे। कर्मियों ने बार-बार जल्दी ही चिकित्सक आने वाले हैं का जुमला सुनाया गया, मगर दो घंटे यानी दस बजे तक सीएचसी अधीक्षक नहीं पहुंचे। सुबह से करीब 24 मरीज पर्ची कटवाकर डॉक्टर का इंतजार करते दिखे। यहीं कार्यरत चिकित्साधिकारी डॉ. पीसी यादव निर्धारित समय पर न आकर 9.20 बजे अस्पताल पहुंचे। डॉ. यादव के आने के बाद एक एक कर चीफ फार्मासिस्ट, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स, एक्स-रे टेक्नीशियन, लैब टेक्नीशियन सहित अस्पताल में कार्यरत अन्य स्वास्थ्य कर्मी अस्पताल पहुंचे। डॉक्टर की गैरमौजूदगी में मरीजों का स्वास्थ्य उपचारिका के भरोसे रहता है। सुबह आठ बजे जब टीम पहुंची थी तो उस समय सिर्फ वार्ड ब्वाय अशोक कुमार कश्यप, वार्ड आया फूलमती व स्टाफ नर्स अरविंद पटेल ही मौजूद मिले। वे अपने कार्य को अंजाम दे रहे थे। अस्पताल परिसर में नगर पंचायत की ओर से शुद्ध पेयजल के लिए स्थापित आरो मशीन बंद मिला। कर्मियों ने बताया कि स्थापना के दो-चार दिन में ही मशीन ने काम करना बंद कर दिया था। इसके चलते अस्पताल आने वाले मरीज व उनके तीमारदारों को पेयजल के भटकना पड़ रहा है। यहां लगा अग्नि शमन यंत्र पूरी तरह से खराब पड़ा हुआ है। आपातकाल में इसका उपयोग संभव नहीं हो सकेगा।
अस्पताल में इलाज कराने आए क्षेत्र के विभिन्न गांवों के मरीज सुदर्शन, गोलू, हरिहर प्रसाद, वीरेंद्र, जोगेंद्र, शर्मिला, प्रमिला, कमला, गोल्डी, भानमती, प्रदीप कुमार, तिलकराज ने बताया कि सुबह से ही चिकित्सक के इंतजार में बैठे हैं। सुबह 10 बजे के बाद धूप व गर्मी बढ़ जाती है, घर जाने में परेशानी उठानी पड़ती है। प्रसव कराने आई परसा झुंगिया निवासनी के परिजनों ने बताया कि महिला डॉक्टर है नहीं , स्टाफ नर्स व दाई से प्रसव कराना मजबूरी है। अस्पताल की व्यवस्था के बारे में पूछने पर अधीक्षक डॉ. एसके चौधरी ने बताया कि रविवार को अवकाश के कारण गांव गया था। वहां पारिवारिक कारणों से आने में विलंब हो गया। वैसे हर दिन समय से ही अस्पताल खुलता है और चिकित्सक भी मौजूद होते हैं। यहां इमरजेंसी सेवा 24 घंटे दी जाती है। महिला चिकित्सक की मांग मुख्यालय से की गई है। प्रसव की स्थिति में गर्भवती को मुख्यालय भेज दिया जाता है।