गेहूं के सीजन में आटा के दाम में उछाल
बस्ती। आटा की बढ़ती कीमत ने गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। एक सप्ताह में आटा दो रुपये प्रति किलो महंगा हुआ है। यह स्थिति तब है जब गेहूं खेत से कटकर बाजार में है।
सामान्य तौर पर गेहूं की फसल के पहले दाम अधिक होते थे। नया गेहूं मंडी में आने के बाद दाम कम हो जाते थे। लेकिन, इस बार ऐसा नहीं हो रहा है। मई-जून में जब गेहूं सस्ता होता था, लोग साल भर के लिए खरीद कर रख लेते थे। लेकिन, इस साल गेहूं का सस्ता होना तो दूर मार्च-अप्रैल से भी महंगा होता जा रहा है। अप्रैल में यह 19 सौ रुपये प्रति क्विंटल बिका था। अब 21 से 22 सौ रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। जिसका असर है कि चक्की वालों और कंपनियों ने दाम बढ़ा दिए हैं। बाजार में एक सप्ताह पहले 10 किलो आटे का लोकल पैकेट 240 रुपये में था। अब वह 260 में बिक रहा है। जबकि ब्रांडेड कंपनी के इसी पैक की कीमत 270 से बढ़कर 290 रुपये हो गई है।
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अभी जल्द ही गैस सिलेंडर का दाम बढ़ा है। अब आटा भी महंगा हो गया है। सभी खाद्य सामग्री महंगी होती चली जा रही है। इस महंगाई में घर चलाना मुश्किल होता जा रहा है।
उषा मिश्रा, नगर बाजार
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पहले गेहूं की फसल जब हो जाती थी, तब गेहूं सस्ता होता था। साल भर के जरूरत के हिसाब से खरीद लेते थे। इस बार तो सस्ता ही नहीं हो रहा है। महंगा आटा खरीद कर खा रहे हैं।
पुनीता त्रिपाठी, गांधीनगर
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मंडी में गेहूं का दाम बढ़ गया है जिससे चक्की और कंपनी वालों ने आटा महंगा कर दिया है। हमें जो पहले मुनाफा मिलता था, आज भी वही मुनाफा मिल रहा है।
चंद्र प्रकाश, किराना व्यापारी गल्ला मंडी गांधीनगर
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आटा के अलावा सभी खाद्य पदार्थ महंगे हो गए हैं। थोक दाम बढ़ने की वजह से हमें फुटकर में भी दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं। मुनाफा वही मिल रहा है।
दीपक कुमार गुप्ता, किराना व्यापारी बड़ेवन