फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Basti News: दीपावली नजदीक आते ही कुम्हारों के चाक की रफ्तार तेज

Sat, 26 Oct 2024 11:45 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
विज्ञापन
नगर बाजार में चाक पर मिट्टी के दीये बनाते कुम्हार-
विज्ञापन
कुम्हारों को उम्मीद, इस बार बिक्री बढ़ेगी और मुनाफा भी होगा
विज्ञापन




संवाद न्यूज़ एजेंसी

नगर बाजार (बस्ती)। दीपावली नजदीक आने के साथ ही कुम्हारों के चाक की रफ्तार तेज हो गई है। उनके परिवार के लोग सुबह से ही मिट्टी के दीपक, प्रतिमा व खिलौना बनाने के लिए दिन रात मेहनत कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि उनकी भी दीपावली औरों की तरह रोशन हो सके। हालांकि बाजारों में तरह तरह के इलेक्ट्रॉनिक झालर, दीपक, प्रतिमा आदि आ जाने से मिट्टी के दीये की बिक्री में काफी कमी आई है। उम्मीद है कि इस बार अच्छा मुनाफा होगा।

मिट्टी के दीये और कलश सहित अन्य सामग्री बनाकर परिवार का पालन-पोषण करने वाले नगर बाजार निवासी राम शब्द प्रजापति ने बताया कि उनका जीवन-यापन का प्रमुख व्यवसाय मिट्टी के बर्तन बनाकर उनकी बिक्री करना है। यही उनकी विरासत है। बताया कि दीपावली के मद्देनजर उन्होंने मिट्टी के दीये बनाए हैं। मगर, चाइनीज सामानों के कारण अब तक अपेक्षा के अनुरूप बिक्री नहीं हो पाई है। उम्मीद जताई कि इस बार बिक्री बढ़ेगी और उनका मुनाफा भी होगा।
विज्ञापन




मिट्टी की सामग्री बनाकर बिक्री करने वाले बुजुर्ग राम गरीब प्रजापति ने बताया कि बाजार में एक से एक दिये आ गए हैं। जिसे लोग मिट्टी के दीये कि अपेक्षा ज्यादा खरीदते हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि इन दिनों मिट्टी के बर्तन बनाने में लागत काफी बढ़ गई है। इसके चलते पहले की तुलना में मुनाफा काफी कम हो गया है। हालत यह है कि मुश्किल से मिट्टी की तलाश पूरी होने के बाद तैयार किए गए मिट्टी के दीये की मेहनत का मेहनताना भी सही से नहीं मिल पाता है। उन्होंने कहा कि पूरी धरती को आप भले ही रोशन ना कर सकें लेकिन जिससे रोशनी के लिए दीपक खरीद रहे हैं। कम से उसकी दिवाली रोशन करने में उसके हक का और अपना हिस्सा देने से पीछे ना हटें।



राम सेवक प्रजापति ने बताया कि दीपावली व गर्मी के सीजन में मिट्टी से निर्मित बर्तनों की मांग जरूर बढ जाती है लेकिन बाद के दिनों में दूसरा कोई काम करके ही परिवार का पेट पालना पड़ता है। दूर से मिट्टी लाना, महंगी लकड़ी खरीदकर दीपक पकाने में जो खर्च आता है उसके बदले आमदनी लगातार घटती जा रही है। पिन्टू प्रजापति ने बताया कि दीपावली में परिवार के साथ दीपक, खिलौना आदि बनाने में लगे हैं। उम्मीद है इस बार हमारी भी दीपावली रोशन होगी। उन्होंने बताया कि बाजारों में इलेक्ट्रॉनिक्स झालरों की चमक-दमक के बीच मिट्टी के दीपक की रोशनी धीमी पड़ती जा रही है। इसके चलते लोग मिट्टी के दीपक का उपयोग महज पूजन के लिए करने लगे हैं ।
विज्ञापन




इसी तरह जगत, श्यामधर, रविंद्र व संतोष कुमार प्रजापति भी पूरे परिवार के साथ दीपक, प्रतिमा, खिलौना आदि बनाने में लगे हैं। उन्हें उम्मीद है कि इस बार अच्छा मुनाफा होगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें