बस्ती। शांति एकता के प्रतीक श्रीगुरु ग्रंथ साहिब के रचयिता गुरु अर्जुन देव को 412वें बलिदान दिवस पर श्रद्धा पूर्वक याद किया गया। शहर में पांच दिवसीय कार्यक्रम श्रद्धा एवं उत्साह से हुआ। गुरु की याद में जिले भर के विभिन्न स्थानों पर कीर्तन दरबार सजा तो लोगों ने लंगर का स्वाद चखा। सिख समुदाय ने जगह-जगह मीठे जल का स्टॉल लगाया, जहां लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
सुबह गुरु के चरणों में माथा टेकने के लिए तांता लग गया। यहां गुरु के शहीदी की याद में जो बोले सो निहाल का जयघोष हुआ। कंपनी बाग गुरुद्वारा गोविंद सिंह मार्ग पर आयोजित कार्यक्रम की अगुवाई सिख सेवादार अमृतपाल सिंह सनम के साथ सैकड़ों सेवादारों ने किया। यहां उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प भी दुहराया गया। यहां पूर्वांचल सिख वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष सरदार जगवीर सिंह ने कहा कि राष्ट्र प्रेम व धर्म के सच्चे मार्ग पर चलते हुए जिन महापुरुषों ने अपने जीवन की कुर्बानी दी है। उन्हें सदैव याद किया जाता रहेेगा। गुरु अर्जुन देव ने मानवता के कल्याण एवं धर्म के सच्चे रास्ते पर चलते हुए वर्ष 1606 में रावी तट के किनारे अपने वचन की रक्षा के लिए कुर्बानी दे दी। उस समय शासक जहांगीर था, सिख इतिहास में गुरु अर्जुन देव ने सबसे पहली कुर्बानी दी। आने वाली पीढ़ी को संदेश दिया कि ईश्वर सत्य है। सच्चे मार्ग पर चलकर दी गई कुर्बानी कभी व्यर्थ नहीं जाती। कहा कि पवित्र धार्मिक ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब में उनके सर्वाधिक 2216 श्लोक हैं। उन्होंने पवित्र धार्मिक स्थल हरमंदिर साहिब का निर्माण भी कराया था। गुरुद्वारा गांधी नगर में प्रधान हरवंश सिंह व मुख्यग्रंथी ज्ञानी प्रदीप सिंह ने कार्यक्रम की अगुवाई की। अंत में गुरुद्वारा कंपनी बाग के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी सुखचैन सिंह ने गुरुग्रंथ साहिब को समर्पित अरदास किया। इस मौके पर हरदीप सिंह, दमन प्रीत सिंह, अखंड पाल सिह, बलजीत सिंह, संतोष सिंह, रावी सिंह, हरजीत सिंह, सरबजीत सिंह, करण सिंह, अमरीक सिंह सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।