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Basti News: 1.51 लाख बच्चों की नहीं बन पाई अपार आईडी, जागरूक कर रहा विभाग

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बस्ती। जिले के सरकारी, गैर सरकारी, कस्तूरबा गांधी, मदरसा और अनुदानित विद्यालयों में पढ़ने वाले करीब 1.51 लाख विद्यार्थियों की अपार आईडी अभी नहीं बन पाई है। विभाग के अनुसार कुछ विद्यार्थियों के पास आधार कार्ड नहीं है, जबकि कई के आधार में त्रुटियां हैं। कुछ अभिभावक भी अपार आईडी बनवाने में रुचि नहीं ले रहे हैं। ऐसे में शिक्षा विभाग की ओर से अभिभावकों और विद्यार्थियों को जागरूक किया जा रहा है।
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जिले में सरकारी, गैर सरकारी, कस्तूरबा गांधी, मदरसा और अनुदानित समेत 3,783 विद्यालय संचालित हैं। यू-डायस पोर्टल पर इन विद्यालयों के 4,12,957 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। इनमें से 2,60,139 विद्यार्थियों की अपार आईडी बन चुकी है, जबकि 1,51,430 की आईडी बनना बाकी है। वहीं, 1,333 विद्यार्थियों की आईडी के लिए आवेदन किया गया था, लेकिन आधार में त्रुटि होने के कारण आवेदन निरस्त हो गया। इनमें यूपी बोर्ड के साथ सीबीएसई और आईसीएसई विद्यालयों के विद्यार्थी भी शामिल हैं।

जूनियर विद्यालयों में 5,204 की आईडी बनना बाकी
बेसिक शिक्षा विभाग के अधीन संचालित मान्यता प्राप्त जूनियर विद्यालयों में 1,12,041 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। इनमें 51,175 की अपार आईडी बन चुकी है। अनुदानित विद्यालयों में पंजीकृत 5,902 विद्यार्थियों में से 5,204 की आईडी बन चुकी है। परिषदीय विद्यालयों में यू-डायस पोर्टल पर पंजीकृत 1,30,090 विद्यार्थियों में 99,853 की आईडी तैयार हो चुकी है। इसी तरह कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में पंजीकृत 884 छात्राओं में 782 की अपार आईडी बन चुकी है। माध्यमिक विद्यालयों के 1,60,585 विद्यार्थियों में से 1,01,791 की आईडी तैयार हो गई है। शेष विद्यार्थियों की आईडी बनाने की प्रक्रिया जारी है।
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क्या है अपार आईडी
अपार आईडी भारत सरकार की ओर से विद्यार्थियों के लिए शुरू की गई 12 अंकों की विशिष्ट डिजिटल पहचान है। इसे वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी भी कहा जाता है। इसका पूरा नाम ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री है। इसमें विद्यार्थियों की मार्कशीट, डिग्री, प्रमाणपत्र, अकादमिक क्रेडिट, छात्रवृत्ति और खेल समेत अन्य उपलब्धियों का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाता है। विद्यालय या कॉलेज बदलने पर विद्यार्थी का शैक्षणिक रिकॉर्ड नए संस्थान में आसानी से स्थानांतरित किया जा सकता है। इससे उच्च शिक्षा में प्रवेश या अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाओं के दौरान बार-बार भौतिक दस्तावेज उपलब्ध कराने की जरूरत कम होगी।
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कोट
जनपद में करीब 88 प्रतिशत अपार आईडी बनाने का काम पूरा हो चुका है। जिन विद्यार्थियों की आईडी नहीं बन पाई है, उनमें किसी के पास आधार नहीं है या आधार में त्रुटि है। कमी दूर कराने के लिए अभिभावकों से अपील की गई है।
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-अनूप कुमार, बीएसए
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