कथित बाबा सच्चिदानंद की शिष्या लखनऊ में गिरफ्तार
बस्ती। संत कुटीर आश्रम में युवतियों से यौन शोषण के आरोप में नामजद कथित बाबा सच्चिदानंद उर्फ दयानंद की शिष्या कमला बाई उर्फ प्रियंका श्रीवास्तव आखिरकार रविवार को पुलिस के हत्थे चढ़ गई। उसे लखनऊ में गिरफ्तार किया गया।
करीब साढ़े तीन वर्ष पहले दुष्कर्म और सामूहिक दुष्कर्म के दर्ज दो मुकदमों में पुलिस को इसकी तलाश थी। इस पर 50 हजार रुपये इनाम घोषित किया गया था। कोतवाल मनोज कुमार त्रिपाठी ने बताया कि एसटीएफ लखनऊ के सहयोग से उसे लखनऊ में एक्सप्रेसवे स्थित टोल प्लाजा के पास से गिरफ्तार किया गया। सोमवार को उसे न्यायालय में पेश किया जाएगा। कोतवाल ने बताया कि इस मामले में अभी बाबा की सहयोगी प्रमिला बाई नहीं मिली है। जल्द उसे भी गिरफ्तार किया जाएगा।
20 दिसंबर 2017 को सच्चिदानंद उर्फ दयानंद और अन्य पर बंधक बनाकर गैंगरेप करने तथा अन्य गंभीर आरोपों में कोतवाली में केस दर्ज किया गया था। पुलिस आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए जगह-जगह दबिश देकर थक गई, मगर वे नहीं मिले। आश्रम की कुर्की तक हो चुकी है। दिसंबर 2017 में यौन शोषण का मामला तब प्रकाश में आया था, जब आश्रम से झारखंड की रहने वाली कुछ युवतियों ने धक्के मारकर निकाल देने का आरोप लगाया। आश्रम की अन्य महिलाओं के साथ किसी तरह छिपते हुए ये महिलाएं उस समय एसपी दफ्तर में पहुंचीं। वहां मौजूद अधिकारियों को जब युवतियों ने आपबीती सुनाई तो वे दंग रह गए।
तत्कालीन एसपी संकल्प शर्मा के निर्देश पर देर रात कथित बाबा के अलावा उसके शिष्यों तथा दो मुख्य सेविकाओं पर पीड़िताओं से वर्ष 2008 से लगातार यौन शोषण व गैंगरेप तथा इस जुर्म में सहयोग करने के आरोप में केस दर्ज किया गया था। केस में कमला बाई उर्फ प्रियंका श्रीवास्तव का भी नाम शामिल है। इनमें महाराष्ट्र के नंदुवार इलाके के रहने वाले परमचेतनानंद और बस्ती की रहने वाली उर्मिला बाई को पुलिस ने पांच अगस्त 2018 को और मुख्य आरोपित सच्चिदानंद उर्फ दयानंद को बीते 30 जून को गिरफ्तार कर लिया था। एक आरोपित प्रमिला बाई अभी पुलिस की पकड़ से दूर है।
यह था आरोप
पीड़ित महिलाओं का आरोप था कि सत्संग व प्रवचन के नाम पर महिलाओं और कम उम्र की लड़कियों को आश्रम में बुलाया जाता है। उनमें से पसंद की लड़कियों को साध्वी का दर्जा देकर आश्रम में रख लिया जाता था। उन्हें अनुष्ठान के जरिए विशेष कृपा दिलाने का दिलासा दिया जाता था। उनका विश्वास जीतने के बाद दिल्ली स्थित आश्रम के मुख्यालय अथवा यहां के कथित बाबा और चेलों के निर्देश पर उन्हें अलग-अलग शहरों में प्रवचन-सत्संग के बहाने भेजकर उनका यौन शोषण किया जाता था।