हर्रैया। करीब 10 साल पहले 2016-17 में कस्बे के पुराने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को तोड़कर 100 शैय्या के महिला अस्पताल का जब उद्घाटन हुआ था तब उस समय लोगों में यह आशा जगी थी कि महिलाओं से जुड़ी बीमारियों के इलाज के लिए लोगों को परेशान नहीं होना पड़ेगा।
स्थानीय स्तर पर ही जिला स्तरीय सुविधाएं मिल जाएंगी, मगर उनकी उम्मीदें पूरी नहीं हो पाईं।
पहले अस्पताल निर्माण में बजट की कमी के चलते हुई लेट लतीफी और फिर चिकित्सकों की नियुक्ति में प्रशासनिक उदासीनता के चलते चार साल पहले किसी तरह से संचालित किए गए अस्पताल में अब भी सुविधाओं का टोटा है। कहने को यह अस्पताल महिलाओं का है, मगर स्त्री रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। सुविधाओं के अभाव में अस्पताल बेमतलब साबित हो रहा है।
करीब साठ करोड़ की लागत से 100 शैय्या के महिला अस्पताल का निर्माण 2016-17 में शुरू हुआ था। इसे दो साल में बनकर तैयार हो जाना था लेकिन यह अस्पताल करीब तीन साल देर से तैयार हो पाया।
अस्पताल की अधीक्षक डाॅ. सुषमा जायसवाल ने बताया कि महीने में दो सौ से अधिक महिलाओं को अल्ट्रासाउंड कराने की जरूरत होती है। इन्हें जिला चिकित्सालय व कैली के साथ ही बाहर से कराकर लाना पड़ता है। महीने में चार दिनों एक, नाै ,16 व 24 तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना में निशुल्क अधिकृत अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर भेजकर सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।