हरैया। पांच जून को एसडीएम से अधिवक्ताओं के विवाद के बाद से हर्रैया तहसील के सभी न्यायिक अदालतें में कामकाज ठप है। गतिरोध को दूर करने के लिए बृहस्पतिवार को एडीएम प्रतिपाल चौहान पर एसडीएम शत्रुघ्न पाठक को डीएम रवीश गुप्ता ने भेजा। अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल से करीब डेढ़ घंटे हुई बातचीत बेनतीजा रही।
आरोप है कि एसडीएम मनोज प्रकाश पर कुछ अधिवक्ताओं ने उस समय हमला कर दिया जब वह कार्यालय जाने के लिए तहसील पहुंचे थे। एसडीएम की तहरीर पर पुलिस ने तीन अधिवक्ताओं पर केस दर्ज किया है। हमले के विरोध में तहसील के लेखपाल व अन्य कर्मी धरने पर बैठ गए और कई दिनों तक तहसील का माहौल गर्म रहा। बाद में लेखपालों का धरना तो समाप्त हो गया, मगर अधिवक्ताओं ने दर्ज केस वापस लिए जाने की मांग करते हुए न्यायिक अदालतों का बहिष्कार कर दिया।
करीब 22 दिनों से अदालतों में कामकाज ठप होने से वादकारियों का हित प्रभावित हो रहा है। इसको लेकर बार एसोसिएशन की बैठक में उठे मुद्दों को लेकर अधिवक्ताओं ने विचार विमर्श के बाद बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी से मिलकर अपनी मांगों से संबंधित पत्र देकर समस्या का हल निकले जाने की मांग की, जिसके बाद दोपहर करीब दो बजे एडीएम प्रतिपाल सिंह चौहान और सदर के एसडीएम शत्रुघ्न पाठक तहसील पहुंचे।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष उमाकांत त्रिपाठी के नेतृत्व में अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई वार्ता में अधिवक्ताओं ने एसडीएम व तहसीलदार के स्थानांतरण की मांग दोहराई, जिस पर एडीएम ने असहमति जताई। इसके अलावा अधिवक्ताओं पर दर्ज केस वापस लेने की मांग पर विचार करने को कहा।करीब डेढ़ घंटे की बातचीत में कोई सार्थक हल नहीं निकलने पर अधिवक्ताओं ने कार्य बहिष्कार जारी रखने का निर्णय लिया। वार्ता में एसडीएम मनोज प्रकाश शामिल नहीं थे।
इस दौरान तहसीलदार पंकज गुप्त, अधिवक्ता अमर नाथ पांडेय, बलराम त्रिपाठी, बाल कृष्ण पांडेय, प्रेम नारायण पांडेय, महावीर प्रसाद द्विवेदी सहित अन्य शामिल रहे।