दुर्घटना : ज्यादा जोखिम भरी है भोर की यात्रा
बस्ती। अगर ज्यादा जरूरी न हो तो भोर में तीन बजे से सुबह छह बजे के बीच यात्रा न करें। ऐसा इसलिए क्योंकि जिले के फोरलेन, टू-लेन व अन्य मार्गों पर जिले में होने वाले भीषण हादसे तड़के तीन बजे से छह बजे के बीच होने का रिकार्ड है।
जानकारों का मानना है कि इस समय के दौरान लंबी दूरी के चालक थककर चूर हो चुके होते हैं। उन्हें झपकी आने लगती है, इसलिए कब आंख बंद हो जाए, यह कहना मुश्किल होता है। एसपी आशीष श्रीवास्तव का कहना है कि सड़क सुरक्षा माह के दौरान इस संबंध में चालकों को काफी आगाह किया जाता है। आंकड़े गवाह हैं कि पिछले एक वर्ष में हुए 184 सड़क हादसों में 70 फीसदी हादसे चालक की लापरवाही के कारण हुए जिसमें तीस फीसदी हादसे तीन बजे से छह बजे के बीच चालक को झपकी आने के कारण हुए।
एनएचएआई के सेफ्टी मैनेजर श्याम अवतार शर्मा का कहना है कि रात तीन बजे से सुबह छह बजे के बीच होने वाले 50 फीसदी हादसे चालक को झपकी आने के कारण होते हैं। जानकार बताते हैं कि इन तीन घंटों के दौरान सड़कें सबसे ज्यादा खाली होती हैं। इस वजह से चालक पूरी रफ्तार से गाड़ी दौड़ाता है। इसी समय जानवरों के सड़क पार करने की संभावना ज्यादा रहती है।
मंगलवार को ही रुधौली थाने के करही गांव से लौट रहे कोरमा थाना कलवारी व डेल्हवा के तीन बाइक सवारों को इसी मनहूस समय में यात्रा करके जान गंवानी पड़ी। शुरुआती जांच में पता चला कि सामने से आ रहे बस चालक को झपकी आ गई थी जिससे वह आगे आई बाइक नहीं देख पाया और बाइक पर सवार तीनों नवयुवकों की मौके पर ही मौत हो गई थी।
सबसे बड़ी बात कि इस बीच जो हादसे होते हैं उनकी भयावहता काफी ज्यादा होती है। उदाहरण के लिए 12 अक्तूबर 2021 को नगर थाने के राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित कटया के पास कार से झारखंड जा रहे एक ही परिवार के पांच लोगों की भीषण सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। तड़के करीब सवा तीन बजे यह कार खड़े कंटेनर में जा टकराई थी। बीते 24 अप्रैल को हिमाचल प्रदेश के किन्नौर के रहने वाले अनिल नेगी अपने परिवार के सदस्यों के साथ कार से बिहार के सिवान जिला जा रहे थे। तड़के पांच बजे फोरलेन पर हर्रैया थाना क्षेत्र के भारत नगर के निकट उनकी कार सड़क किनारे एक पेड़ से टकरा गई। घटना में कार सवार पांच यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना पर पहुंची एनएचएआई की टीम ने घायलों को सीएचसी हर्रैया भेजवाया।
इस समय आने लगती है सुस्ती
जानकार मानते हैं कि तड़के तीन बजे से छह बजे का ऐसा वक्त होता है जब अक्सर नींद आने लगती है। लंबी दूरी की यात्रा करके थक चुके चालक हों या हल्की-फुल्की नींद पूरी करके निकले यात्री हों। खासकर गर्मी के सीजन में उस समय मौसम ठंड होने से सुस्ती आने लगती है। चालक कितना भी कोशिश करे कि उसकी आंख न लगने पाए, मगर चार-छह सेकेंड के लिए झपकी आ ही जाती है। इसी दौरान वाहन अनियंत्रित होकर दुर्घटना कर बैठता है।
इन बातों का रखें ख्याल
- अगर सुस्ती आए तो तत्काल गाड़ी को किनारे लगा लें।
- तीन से चार घंटे की ड्राइविंग पर कहीं चाय या पानी पीकर फ्रेश हो जाएं।
- अगर रात को नींद पूरी न हुई हो तो सुबह गाड़ी लेकर न निकलें।
- अगर कोई शुगर का मरीज हो तो लंबी ड्राइविंग न करें।
- पूरी रात को सफर तय करने से बचें।
- चालक की सीट के बगल में बैठने वाले न सोएं।