बस्ती। वाॅल्टरगंज थाने के धौरहरा गांव के जामवंत शर्मा की कहानी बॉलीवुड की किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है। हत्या के केस में लंबी सजा स बचने के लिए खुद को जलाकर मारने का षड्यंत्र रचने वाले जामवंत केस की पुलिस तह तक पहुंच चुकी है।
स्वाट, एसओजी, सर्विलांस, साइबर एक्सपर्ट की टीम को यह गुत्थी सुलझाने में झोंक चुकी है। फिलहाल डीएनए रिपोर्ट के आधार पर यह तो साफ हो चुका है कि जामवंत ने षड्यंत्र के तहत खुद को मरा साबित करने के लिए किसी दूसरे का शव जलाकर भाग गया है। मगर वह कहां है, इसका पता दो माह बीतने के बाद भी पुलिस नहीं लगा पाई है।
जबकि, पुलिस शुरू से यह मानकर चल रही है कि जामवंत जिंदा है। इसके अलावा एक और सवाल इसी के साथ जुड़ा हुआ है कि यदि जामवंत जिंदा है तो कमरे में जलाया गया शव किसका था।
पुलिस का संदेह है कि या तो कोई अधजला मुर्दा उसके हाथ लग गया था, जिसे जला करके वह भाग गया अथवा उसने बगल के गांव मुनियांव के रहने वाले अपने जिगरी दोस्त अंगद को बलि का बकरा बना दिया।
क्योंकि अंगद अपनी जमीन और ट्रैक्टर बेचकर कई महीने से लापता है। माना जा रहा है कि अंगद के लापता होने में भी जामवंत का हाथ है। पुलिस की एक थ्योरी यह भी कह रही है कि यदि जामवंत ने अंगद को बलि का बकरा नहीं बनाया है तो दोनों एक साथ ही कहीं मौज से हैं।
सीओ सत्येंद्र भूषण त्रिपाठी ने बताया कि पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। सभी पहलुओं पर छानबीन चल रही है। उम्मीद है कि सच्चाई जल्द सामने आ जाएगी।