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आलम और ताबूत का निकला जुलूस

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बस्ती। मौला अब्बास की याद में अलम और ताबूत का जुलूस निकाला गया। जुलूस में अश्कबार सोगवारान मौला अब्बास की शहादत को बयान करने वाला नौहा पढ़ा गया। साथ ही अकीतदमंदों ने मातम किया।
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शुक्रवार की रात स्टेट बैंक के पीछे लाडली मंजिल से मातमी जुलूस निकाला गया। जुलूस में शामिल अकीदतमंदों ने प्रतीक के रूप में ताबूत उठाकर मातम किया। जुलूस में अलम भी शामिल किया गया था। जुलूस के पूर्व इमामबाड़ा लाडली मंजिल में मजलिस का आयोजन किया गया। जिसे मौलाना अलीहसन ने खिताब फरमाया। कहा कि मौला अब्बास का किरदार वफादारी की जिंदा मिसाल है। वह इमाम हुसैन के भाई थे। अब्बास ने हमेशा खुद को इमाम का गुलाम ही समझा। इन्हें हुसैनी फौज का सरदार कहा जाता है। तीन दिनों के प्यासे बच्चों की प्यास जब देखी न गई तो मौला अब्बास पानी लाने के लिए नहरे फरात पर गए थे। पानी लेकर जब वे लौट रहे थे तो यजीदी फौज ने छुपकर हमला कर दिया। उनके दोनों बाजू काट दिए। सारा पानी जमीन पर बह गया। बाद में यजीदी फौज ने इन्हें घेर कर शहीद कर डाला। जुलूस में मोहम्मद रफीक, सुहेल हैदर, आबिद रिजवी, सज्जाद रिजवी, साबिर रिजवी, साजिद रिजवी, सोनू आदि शामिल हुए।
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