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परमिट सूखे पेड़ का, काट रहे हरा

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गौर। पर्यावरण की रक्षा के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे सभी दावे फेल हो गए हैं। पुलिस और वन विभाग की मिली भगत से हरियाली के दुश्मनों का आरा तेजी से चल रहा है। जिससे वन संपदा पर भी गंभीर खतरा मंडराने लगा है।
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गौर थाना के हलुआ क्षेत्र में बिना रोक-टोक के वन मफिया हरे पेड़ों को काट रहे हैं। हरियाली के दुश्मनों ने नियम व शर्तों को दरकिनार कर हरे पेड़ों के बागों का सफाया करने में लगे हैं। वन माफियाओं ने नया तरीका ढूंढ़ निकाला है। क्षेत्र के राम शंकर का कहना है कि परमिट के लिए वन स्वामी से क्षेत्रीय वन कार्यालय में आवेदन तो कराया जाता है। मगर हरियाली के दुश्मनों की अच्छी पैठ होने के चलते आफिस में बैठकर सूखे व रोगग्रस्त होने की रिपोर्ट पर विभाग से परमिट जारी कर दिया जाता है। इतना ही नहीं, यदि दो पेड़ का परमिट है तो वन माफिया चार छह पेड़ कटवाते हैं। कभी-कभी पूरा बाग ही साफ कर देते हैं। जगदीश का कहना है कि गांवों वालों के शोर मचाने पर वन विभाग व पुलिस यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लेती हैं कि परमिट बना हुआ है। इसका फायदा उठाकर हरियाली के दुश्मन बागों का सफाया कर रहे हैं। बाल गोविंद का कहना है कि अवैध तरीके से काटी गई लकड़ियों का भंडार क्षेत्र की हलुआ, गौर, बभनान की कुछ आरामशीनों पर लगा रहता है। यहां पर दिन रात लकड़ी का चीरान होता है। सबसे अधिक सरकारी जंगल क्षेत्र होने से हलुआ क्षेत्र में यह कारोबार सबसे अधिक होता है। इस संबंध में रामनगर के रेंजर टीपी सिंह ने कहा कि जितने पेड़ का परमिट बनता है उतने ही पेड़ कटवाने का अधिकार है। यदि कोई ठेकेदार परमिट से अधिक पेड़ कटवाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी की जाती है। बगैर परमिट के कोई पेड़ नहीं काटा जाता है। रही बात जंगल के किनारे पेड़ों की तो वहां कुछ वन माफिया हैं। जिनको चिह्नित किया गया है। बहुत जल्द ही पकड़ में आ जाएंगे।
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