हवा में बना दीं सड़कें, फिर भी विभागीय अफसर कुछ बोलने को तैयार नहीं, गोपनीय ढंग से तैयार हो रही रिपोर्ट
चार साल पहले हुआ था मामले का भंडाफोड़, दो एई और एक एक्सईएन हो चुके हैं बर्खास्त
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। हवा में सड़कें बनाकर 40 करोड़ रुपये का फर्जी भुगतान करने का मामला थमने का नाम नहींं ले रहा है। इस प्रकरण से लोक निर्माण विभाग में निचले पायदान से लेकर अधिशासी एवं अधीक्षण अभियंता कार्यालय तक सनसनी फैली है। मगर, इस मुद्दे पर विभागीय अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। भले ही एक दिन पहले 13 चर्चित विभागीय ठेकेदारों का पंजीकरण समाप्त करने और काली सूची में शामिल करने की कार्रवाई क्यों न हुई हो। हालांकि डीएम अंद्रा वामसी ने खुद इस खबर की पुष्टि की है।
बृहस्पतिवार को लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड कार्यालय में दोपहर 12 बजे तक सन्नाटा रहा। एक्सईएन केशव लाल का कक्ष बंद मिला। उनके दो सहायक अभियंता कक्ष में से एक में ताला लगा हुआ था तो दूसरे की कुर्सी खाली मिली। वहां मौजूद चतुर्थ श्रेणी कर्मियों ने बताया कि बड़े साहब मीटिंग में गए हैं। जबकि सहायक अभियंता की ट्रेनिंग चल रही है। अलबत्ता स्टेनो कक्ष में कुछ ठेकेदार कर्मचारियों से बातचीत कर रहे थे। उन्हें जैसे पता चला मीडिया आ गई है ठेकेदार बाहर निकल लिए।
एक कर्मचारी ने बताया कि स्टेनो एक्सईएन के साथ मीटिंग में कहीं गए हैं। ठेकेदार प्रकरण पूछने पर सब चुप हो गए। बस इतना बोले कि मामला शासन स्तर का है, लेकिन अभी कार्रवाई से संबंधित कोई पत्रक विभाग में नहीं आया है। जबकि एक्सईएन केशव लाल ने फोन ही नहीं रिसीव किया। एसई अशोक कुमार अपने कक्ष में मौजूद मिले। उन्होंने बताया कि 13 ठेकेदारों के पंजीकरण समाप्त होने संबंधी कोई जानकारी मुख्यालय से प्राप्त नहीं हुई है। वह इस प्रकरण पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया।
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क्या है प्रकरण
आरोप है कि वर्ष 2018 से पहले लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड में 200 सड़कों के निर्माण पर 40 करोड़ रुपये का फर्जी भुगतान कर दिया था। इस मामले का भंडाफोड़ हुआ तो शासन ने जांच शुरू करा दी। जांच में पाया गया विभाग के विभिन्न मदों का धन बिना अनुमति के सड़क निर्माण पर खर्च कर दिया गया। जांच टीम को खर्च धन का स्पष्ट ब्योरा भी नहीं मिल सका। इसी के बाद आरोपी अभियंताओं और ठेकदारों पर कार्रवाई की संस्तुति कर पत्रावली शासन में भेज दी गई थी।
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कार्रवाई की जद में आए यह ठेकेदार
डीएम के अनुसार पंजीकरण समाप्त और काली सूची में शामिल किए जाने वाले ठेकेदारों में जनार्दन पाठक ग्राम खरहटिया, मेसर्स एटी कंस्ट्रक्शन शामिल है। इनका पंजीकरण प्रमुख अभियंता लखनऊ कार्यालय से था। जबकि गोरखपुर क्षेत्र में पंजीकृत मेसर्स शिव शक्ति कंपनी, मे. शिव कंस्ट्रक्शन कंपनी, में. चौधरी कंस्ट्रक्शन ग्राम रमवापुर, मे. तारा कंस्ट्रक्शन आवास विकास कॉलोनी, मे. शिक्षा शक्ति कंस्ट्रक्शन ग्राम गाना, प्रेम सागर गुप्ता ग्राम गौरा, जयप्रकाश सिंह, सत्येंद्र बहादुर सिंह तथा संजय कुमार सिंह शामिल हैं।
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ये लोग हो चुके हैं बर्खास्त
वर्ष 2018 में लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड में 40 करोड़ रुपये के फर्जी भुगतान का मामला पकड़ में आया था। शासन ने इस पर जांच शुरू करा दी। तत्कालीन अधिशासी अभियंता अलोक रमन निलंबित कर दिए गए थे। जांच में दोषी पाए जाने पर उन्हें और तत्कालीन एई एके आर्या और वीके राम को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। जबकि इस मामले में आरोपी दो जेई पर कार्रवाई शासन स्तर पर विचाराधीन है।
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मामले में 43 ठेकेदारों हुए थे सूचीबद्ध
फर्जी भुगतान के प्रकरण में जिले के छोटे-बड़े 43 ठेकेदारों को सूचीबद्ध किए गए थे। इन ठेकेदारों ने अलग-अलग मदों का भिन्न-भिन्न सड़कों का निर्माण कराने में भूमिका निभाई थी। विभाग ने सभी ठेकेदारों से रिकवरी का नोटिस भी जारी किया था। कुछ ठेकेदार ने कार्रवाई से बचने के लिए रिकवरी की धनराशि जमा भी कर दी है। इधर कार्रवाई की जद में सिर्फ 13 ठेकेदारों के आने से तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं।
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नहीं डाल सकेंगे नए कार्यों का टेंडर
काली सूची में शामिल 13 ठेकेदारों का पंजीकरण निरस्त हो गया है। अब यह लोग विभाग के नए कार्यों को हथियाने के लिए टेंडर नहीं डाल सकेंगे। चर्चा है कि इसमें शामिल रसूखदार ठेकेदार शासन स्तर पर अपनी दलील रखने के लिए राजधानी पहुंच गए हैं।
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अंदर ही अंदर तैयार हो रही रिपोर्ट
लोक निर्माण विभाग के सभी प्रखंडों में काली सूची में शामिल किए गए ठेकेदारों की कुंडली अंदर ही अंदर खंगाली जाने लगी है। सूत्रों के अनुसार इन ठेकेदारों के पंजीकरण संबंधित प्रपत्रों को शासन ने तलब किया है। साथ ही, इनके नाम आवंटित कार्यों का ब्योरा भी मांगा गया है। भुगतान एवं बकाया सहित समस्त रिपोर्ट विभाग में तैयार की जा रही है।
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कोट
लोक निर्माण विभाग के 13 ठेकेदारों का पंजीकरण शासन स्तर से निरस्त करने का आदेश जारी हो चुका है। इन्हें काली सूची में भी शामिल किया गया है। जिस कार्यालय से इनका पंजीयन हुआ है वहां से निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। इन ठेकेदारों से संबंधित रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए जा चुके हैं।
-अंद्रा वामसी, डीएम