बस्ती। बजट खर्च करने में आगे रहने वाली ग्राम पंचायतें कमाई में पीछे रह गई हैं। प्रदेश सरकार की ओर से 1500 तक की आबादी वाली ग्राम पंचायतों के लिए शुरू की गई प्रोत्साहन राशि योजना में 264 पंचायतें रुचि ही नहीं दिखाईं और मौका पाकर भी धनराशि पाने से वंचित रह गईं, जबकि 160 पंचायतें कमाई के जरिये पांच गुना राशि पाकर नजीर भी बनीं।
स्वयं के संसाधनों से आय (ओएसआर) अर्जित करने वाली ग्राम पंचायतों को पांच गुना प्रोत्साहन राशि दी जाती है। पंचायत प्रतिपूर्ति एवं प्रोत्साहन योजना के तहत मिलने वाली धनराशि से विकास कार्य कराए जा सकेंगे। डीएम की अध्यक्षता में एक टीम सर्वे कर ऐसे ग्राम पंचायतों का चयन करती है और इसके बाद योजना का लाभ दिया जाता है। जिले में ऐसी ग्राम पंचायतें जिनकी आबादी 1500 से कम है। इन पंचायतों को मिलने वाली वित्तीय राशि बहुत कम होती है।
यह धनराशि अनुरक्षण, पंचायत सहायक और केयर टेकर के मानदेय सहित कई जरूरी कार्यों में खर्च हो जाती है। विकास कार्यों के लिए पैसा ही नहीं बचता है। ऐसे में सरकार ने ऐसी ग्राम पंचायतों को समस्या से उबारने के लिए पंचायत प्रतिपूर्ति एवं प्रोत्साहन योजना शुरू की है।
इसमें तय किया है कि यदि पंचायतें जनसेवा केंद्र शुल्क, कूड़ा संग्रहण, तालाब पट्टा, दुकान किराया, जल शुल्क आदि से आय अर्जित करेंगी तो उन्हें पिछली साल की अर्जित आय की पांच गुना राशि प्रोत्साहन स्वरूप राज्यांश मद से दी जा रही हैं। इस श्रेणी में जनपद में 423 ग्राम पंचायतों का चयन हुआ था, जिसमें सिर्फ 160 ग्राम पंचायतों ने ही यह लाभ पाया है। शेष ग्राम पंचायतें ढिलाई के चलते वंचित रह गई हैं।
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुआ था परीक्षण : डीएम की अध्यक्षता में समिति बनाई गई है। समिति जांच करके तय करती है कि किस ग्राम पंचायत ने कितनी आमदनी की है। उसी आधार पर प्रोत्साहन राशि तय की गई है। इस धन का उपयोग ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर योजना जनरेट कर विकास कार्यों पर हो सकेगा।