बस्ती। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजीव यादव की अदालत ने भ्रूण हत्या के मामले में अप्रशिक्षित डॉक्टर दंपती को दस-दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने प्रत्येक को 17-17 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। इसे अदा न करने पर एक वर्ष की अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
शासकीय अधिवक्ता नित्यानंद यादव ने अदालत को बताया कि कोतवाली थाना क्षेत्र के बेलगड़ी गांव निवासी अजय कुमार तिवारी अपनी गर्भवती पत्नी दयावती तिवारी का इलाज कृष्णा भगौती स्थित पांडेय क्लीनिक संचालित करने वाले अप्रशिक्षित डॉ. धीरेंद्र नाथ पांडेय व उनकी पत्नी सुनैना पांडेय से कराते थे। 14 अक्टूबर 2006 को दयावती की तबीयत खराब हुई तो उपचार के लिए पहुंचे। जहां डॉ. सुनैना ने अपने पति से राय ली और अजय को बताया कि उनकी पत्नी के पेट का गर्भस्थ शिशु मर चुका है। ऐसे में आपरेशन कर उसे निकालना पड़ेगा। जांच के लिए अजय से तीन हजार रुपये लिए।
जांच करवाने के बाद 17 अक्टूबर 2006 को फिर से तीन हजार रुपये लेकर ऑपरेशन किया और बच्चा निकालने का प्रयास करने में जुट गए। इसी दौरान दयावती की स्थिति बिगड़ गई। हालत खराब होते देख दंपती ने हाथ खड़े कर दिए। पत्नी को लेकर अजय और उनका परिवार जिला महिला चिकित्सालय पहुंचा, जहां डाक्टरों ने उन्हें गोरखपुर मेडिकल कालेज रेफर कर दिया। गोरखपुर ले जाते समय रास्ते में दयावती ने दम तोड़ दिया।