बरेली। बेहतर कॅरिअर के लिए उच्च व तकनीकी शिक्षा जरूरी है पर इनकी महंगी फीस कई युवाओं के सपनों के आड़े आ जाती है। इससे निपटने के लिए वह शिक्षा ऋण का सहारा ले रहे हैं। इसके जरिये वह पढ़ाई पूरी कर सफलता के नए आयाम गढ़ रहे हैं। यूनियन बैंक स्टाफ एसोसिएशन के महामंत्री पीके माहेश्वरी के मुताबिक, शिक्षा ऋण की मदद से युवा पढ़ाई के लिए दिल्ली, नोएडा और बंगलूरू का रुख कर रहे हैं, ताकि उन्हें बेहतर शिक्षा मिल सके।
मौजूदा समय में मध्यमवर्गीय और निम्न-मध्यवर्गीय परिवारों के लिए वित्तीय सहायता के बिना बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाना किसी चुनौती से कम नहीं है। बढ़ती मांग को देखते हुए बैंक भी आकर्षक ब्याज दरों और आसान शर्तों पर शिक्षा ऋण उपलब्ध करा रहे हैं। सरकार की ओर से चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं ने भी युवाओं और उनके परिवारों का हौसला बढ़ाया है। हालांकि, इस सुविधा के साथ ही छात्रों पर भविष्य का वित्तीय बोझ भी बढ़ रहा है। पढ़ाई पूरी होने के बाद लोन की किस्तें चुकाना कई छात्रों के लिए चुनौती साबित हो रहा है। यह समस्या उन छात्रों के लिए अधिक गंभीर हो जाती है जो आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आते हैं और जिन्हें पढ़ाई के तुरंत बाद मनमुताबिक रोजगार नहीं मिल पाता।
प्राइवेट बैंक पीछे
युवाओं को शिक्षा ऋण देने के मामले में प्राइवेट बैंक काफी पीछे हैं। वित्त वर्ष 2023-24 में 30, 2024-25 में 144 व 2025-26 में 157 युवाओं को ही प्राइवेट बैंकों की ओर से शिक्षा ऋण मुहैया कराया गया है।
राजेंद्रनगर के आशीष गुप्ता ने बताया कि उन्होंने एमबीए करने के लिए सरकारी बैंक से लोन लिया था। सरकारी की बैंक की ब्याज दर कम होती है। इस वजह से वहां से ऋण लिया। एमबीए करने के बाद दिल्ली ने नौकरी करके लोन चुका रहे हैं।
कर्मचारी नगर की कनिष्का सिंह ने बताया कि एमटेक करने के लिए पैसे नहीं थे तो उन्होंने शिक्षा ऋण लिया। इस दौरान कुछ परेशानियां हुईं, लेकिन लोन मिल गया। अब एक मल्टी नेशनल कंपनी में काम कर रही हैं और किस्तें भी चुका रही हैं।
वित्त वर्ष 2023-24 में बैंकों की ओर से 1061 युवाओं को 1953.7 लाख रुपये का ऋण दिया गया। वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा क्रमवार 1439 व 798.69 लाख पहुंच गया। वित्त वर्ष 2025-26 1654 युवाओं को 5518.49 लाख रुपये के ऋण वितरित किए गए।
शिक्षा ऋण का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। किसी को कहीं कोई परेशानी आ रही हो तो वह एलडीएम कार्यालय में आकर संपर्क और शिकायत कर सकता है। - कृष्ण कुमार, एलडीएम