117 सालों बाद शिवरात्रि पर बन रहा दुर्लभ संयोग
बरेली। निराकार से साकार स्वरूप की साधना के लिए मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि अबकी बार जातकों के लिए बेहद शुभ फलदायी रहेगी। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक 117 सालों बाद बन रहे दुर्लभ संयोग के चलते विधि विधान से पूजन करने वाले जातकों की मनोकामनाएं पूरी होंगी। इस दिन शनि और चंद्रदेव की आराधना करने से सभी दोषों से मुक्ति मिल जाएगी।
ज्योतिषाचार्य डॉ. सौरभ शंखधार के मुताबिक, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी 21 फरवरी यानी शुक्रवार को महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। करीब 117 सालों बाद गुरु इस दिन अपनी राशि धनु में विराजित हैं। इससे पहले यह योग 25 फरवरी 1903 को बना था। वहीं, शनि अपनी राशि मकर में और शुक्र ग्रह अपनी उच्च राशि मीन में विराजमान हैें। 28 साल पहले दो मार्च 1992 को शनि और चंद्र की युति से विष योग भी इस दिन बना था। इसबार भी ऐसा ही है और इस योग में आराधना करने से शनि और चंद्र दोष से मुक्ति मिलने की बात शास्त्रों में कही गई है। साथ ही, बुधादित्य और काल सर्प योग भी बन रहे हैं। बताया कि जिसकी जन्म कुंडली में काल सर्प योग और विष योग हो तो उनकी शांति के लिए यह सबसे बेहतर अवसर है। 21 फरवरी की शाम 5.22 बजे तक त्रयोदशी तिथि रहेगी, उसके बाद चतुर्दशी तिथि शुरू हो जाएगी। देर रात चतुर्दशी तिथि शुरू होगी। इसलिए उदयातिथि का मान होने के कारण महाशिवरात्रि 21 फरवरी को मनाई जाएगी। ब्यूरो