बरेली। यूपी देश का इकलौता ऐसा राज्य है जिसे मानव और वन्यजीवों के संघर्ष को राज्य आपदा घोषित किया गया है। हालांकि बाघों की बढ़ती संख्या जंगलों के बेहतर स्वास्थ्य का संकेतक हैं। लिहाजा बाघों को मारने की नहीं बल्कि इंसानों को जागरूक करने की जरूरत है।
वन्य जीवों पर अध्ययन के साथ जंगलों के भ्रमण के शौकीन आईएएस संजय कुमार ने पर बरेली मंडल में वन्य जीवों और मानव के बीच संघर्ष की बढ़ती घटनाओं पर अमर उजाला से बातचीत में यह दावा किया। बरेली के पूर्व डीएम संजय कुमार ने बताया बाघ का कुनबा उसी जंगल में बढ़ता है, जिसका स्वास्थ्य अच्छा होता है। यानी उनके आहार के लिए पर्याप्त हिरन और चीतल जैसे जानवर होते हैं। यह जानवरों की अच्छी संख्या तभी होती है, जब उनके लिए बेहतर घास और पौधे जंगल में होते हैं। यह पूरा तंत्र जंगल के बेहतर स्वास्थ्य की पहचान है। बाघ दो ही परिस्थिति में जंगल से बाहर आते हैं, पहला जब जंगल के हालात बेहतर न हो या फिर उनका कुनबा बहुत बढ़ गया हो और मजबूत साथी उन्हें मुश्किल पैदा कर रहे हों। उनके बाहर आने पर उनसे टकराव के बजाय बचाव की जरूरत होती है। इसके लिए जंगल से लगे गांवों और स्कूलों में जागरूकता की जरूरत है। लोगों को समझाना होगा कि अगर कोई सिर्फ घायल हुआ है तो समझो कि बाघ का वार चूका नहीं बल्कि वह आपसे टकराना नहीं चाहता।
प्रदेश में हर साल 150-200 घटनाएं
साल भर में पूरे प्रदेश में वन्य जीवों और इंसानों के बीच संघर्ष के 150-200 मामले होते हैं। इनमें 100-125 लोग हताहत भी होते हैं। इस समय पीलीभीत, दुधवा, कतरनिया घाट और किशनपुर रेंज बाघों के लिए अच्छे ठिकाने हैं। संजय कुमार ने बताया कि भविष्य में बलरामपुर में सुहेलदेव, महराजगंज का सुहागी वर्ब और सहारनपुर में शिवालिक रेंज वन प्रभाग को भी बाघ अभयारण्य घोषित किया जा सकता है।
वन विभाग को मजबूत करने की जरूरत
संजय कुमार ने वन विभाग की ताकत बढ़ाने की भी जरूरत बताई। उन्होंने कहा मौजूदा समय में वन विभाग में स्टाफ बढ़ाने के साथ ही आधुनिक तकनीक से सुसज्जित करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा- वन विभाग गांवों में वालंटियर की टीमें भी तैयार कर सकता है जो जंगली जानवर और इंसानों के बीच संघर्ष को कम करने में मदद करें।
संघर्ष में मौत पर पांच लाख तक मदद
संजय कुमार ने बताया कि जब वह राहत आयुक्त थे तो जंगली जानवर और इंसानों के संघर्ष को लेकर वर्ष 2018 में शासन के समक्ष प्रस्ताव रखा था। इसके बाद शेर, चीता, हाथी जैसे जंगली जानवरों से संघर्ष के दौरान मौत को राज्य आपदा घोषित किया गया। ऐसा करने वाला उत्तर प्रदेश पहला राज्य है। अब ऐसा हादसा होने पर डीएम पांच लाख रुपये तक की धनराशि तत्काल दे सकते हैं।