बेटियों के प्रति खत्म नहीं हुआ है भेदभाव
कई महिलाओं का मानना था कि अभी भी घरों में बेटियों के प्रति भेदभाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। बेटियों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। इसके जिम्मेदार परिजन हैं। सुझाव दिया कि परिवार की जिम्मेदारी है कि बेटियों से ज्यादा बेटों को समझाएं। उन्हें महिलाओं का सम्मान करना सिखाएं।
सही-गलत का फर्क समझाना जरूरी
संवाद के दौरान महिलाओं ने बताया कि वर्तमान में कई बेटियां सही-गलत का फर्क नहीं कर पातीं। घर से भागना, फोटो-वीडियो शेयर करना, बेहतर भविष्य के लिए जरूरी बातों का विरोध करना, अधिकारों का दुरुपयोग करने और दोहरी जिम्मेदारी (परिवार और नौकरी) में सामंजस्य न बिठा पाने से आपराधिक गतिविधियों का शिकार होने की आशंका रहती है। सही-गलत का फर्क समझना जरूरी है।
मंथन के मोती
अभिभावक बच्चों की बातों का सुनें व समझें।
बेटियां अंतरिक्ष तक उड़ान भर रही हैं। उन्हें बढ़ने का मौका दें।
परिजन बहू-बेटियों की तकलीफ को समझें।
स्वस्थ, शिक्षित महिला से ही समाज आगे बढ़ेगा।
बेटों पर भी नकेल कसें। उन्हें महिलाओं का सम्मान करना सिखाएं।
बेटा-बेटी के साथ दोस्ताना व्यवहार रखें।