बरेली। दहशत का पर्याय बने हाथी के जोड़े को उत्तराखंड के जंगलों में भेजने के लिए वन विभाग की ओर से चलाए जा रहे अभियान पर अब सवालिया निशान लगने लगे हैं। हाथियों को उनके घर वापसी की कवायद के नाम पर वन विभाग के आला अधिकारियों की फौज तो बुला ली गई, लेकिन जब बात हाथी की टोह लेने की चली तो चार वन कर्मियों को महज डंडा थमाकर भेज दिया गया। टीम के पास न कोई सुरक्षा थी, न ही आपात स्थिति से निपटने की कोई प्लानिंग। इन्हें गाइड करने वाला वन विभाग का कोई अफसर भी साथ नहीं था।
नेपाल से बहेड़ी क्षेत्र में 27 जून को दो हाथी रास्ता भटक कर पहुंचे थे। उसी दिन हाथी ने एक किसान को पटककर मार डाला था। वन विभाग इस घटना के बाद कुछ संजीदा जरूर हुआ, लेकिन इन हाथियों को उत्तराखंड भेजने के लिए जो रणनीति बनाई, वह काम नहीं आई। वन विभाग इन हाथियों को शार्टकट रास्ते से उत्तराखंड की सीमा में भेजना चाहता था। विभाग के अधिकारियों को मानना था कि उत्तराखंड के जंगल में पहुंचने के बाद पड़ोस के नेपाल के जंगल में पहुंच जाएंगे। पहले दिन हाथियों को आपरेशन हांका के जरिये उन्हें उत्तराखंड की सीमा तक ले जाने में कामयाब भी हो गए, लेकिन नदी के कारण हाथी आगे नहीं बढ़ सके और रामपुर पहुंच गए। वहां भी इन हाथियों ने दो लोगों की जान ले ली। हाथी पिछले दो दिन से रामपुर और बरेली सीमा के बीच में विचरण कर रहे थे। तीन लोगों की मौत के बाद विभाग की चिंता बढ़ी तो शासन के निर्देश पर तीन मुख्य वन संरक्षक, दो वन संरक्षक समेत कई जिलों के डीएफओ को भी बुला लिया गया। दावा किया गया कि उच्चाधिकारियों के निर्देशन में टीमें बना दी गई हैं। रेंजर और एसडीओ स्तर के अधिकारियों को टीम के साथ लगाने के दावे भी किए गए, लेकिन ये दावे हकीकत में झूठे निकले। बुधवार को जब हाथी ने एक फॉरेस्ट गार्ड हेमंत को मार डाला तो वन विभाग के दावों की पोल खुल गई। दरअसल बिना किसी सुरक्षा और वरिष्ठ अधिकारी के चार वन कर्मियों को महज डंडा थमाकर हाथी की टोह लेने भेज दिया गया। गनीमत रही कि उस दौरान घटना स्थल के निकट शीशगढ़ पुलिस मौजूद थी। यदि दो हवाई फायर न किए जाते तो हाथी किसी और को भी मार सकते थे।
सामने दिखा हाथी तो भाग गए साथी
हेमंत पर जब हाथी ने हमला किया तो उनके कुछ पीछे चल रहे तीन अन्य वन्यकर्मी उसे बचाने की कोशिश के बजाय भाग खड़े हुए। मौके पर मौजूद शीशगढ़ थानाथ्यक्ष श्याम सिंह बताया कि हमले को देख जब उन्होंने हवाई फायर किया तो हाथी दूर चला गया। इसके बाद हेमंत को बचाने के लिए जब वह उसके पास पहुंचे तो देखा कोई वनकर्मी मौजूद नहीं था। कुछ देर बाद वनकर्मी और ग्रामीण मौके पर पहुंचे।
करीब से वीडियो बनाना चाहता था
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हाथी की आहट मिलने के बाद हेमंत ने अपना मोबाइल निकाल लिया था। वह मोबाइल हाथ में लेकर आगे बढ़ता हुआ चल रहा था। इसी बीच हाथी की नजर उस पर पड़ गई और हाथी ने दौड़ कर उस पर हमला कर दिया। यह बात मुख्य वन संरक्षक ललित कुमार वर्मा नेेेे भी स्वीकार की। उन्होंने बताया कि घटना के बाद मौके पर की गई पूछताछ में भी लोगों ने यह बात कही है। वहीं हाथी के हमले से घायल होकर गिरने के बाद हेमंत किसी से बात करना चाहते थे। थानाध्यक्ष शीशगढ़ ने बताया कि हेमंत को यह कहकर रोका कि बात करोगे तो हाथी उन्हें जीवित समझ फिर वापस आ सकता है। थानाध्यक्ष ने बताया कि हेमंत के शरीर पर कोई जाहिरा चोट के निशान नहीं थे। सिर्फ गुम चोट थी। आधे रास्ते तक हेमंत होशोहवाश में रहे और थोड़ा बहुत बोले भी।
मासूम बच्चों के सिर से भी उटा साया
पोस्टमार्टम के बाद वन रक्षक हेमंत का शव बाला जी कॉलोनी स्थित उनके आवास पहुंचा तो वहां कोहराम मच गया। पत्नी पत्नी सरिता का रो-रो कर बुरा हाल है। हेमंत अपने पीछे दो मासूम बच्चे छह वर्षीय निकेत व नौ माह के आर्यांश को छोड़ गए हैं।
गार्ड ऑफ आनर के बाद आज होगा अंतिम संस्कार
वन रंक्षक हेमंत के शव का अंतिम संस्कार गुरुवार को किया जाएगा। हेमंत के ससुर नत्थूलाल राठौर ने बताया कि वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि शासन से कुछ वरिष्ठ अधिकारी सुबह पहुंच कर गार्ड आफ आनर के बाद श्रद्धा सुमन अर्पित करेंगे। इसके बाद बाला जी कालोनी से शव यात्रा रवाना होगी। निकट के श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया जाएगा।