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ढूंढिए जमीन पर कहां हैं सरकारी शौचालय!

Thu, 02 Jun 2016 01:11 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
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निर्मल भारत और स्वच्छ भारत मिशन के तहत लोहिया गांवों में बनाए गए 20 हजार से ज्यादा शौचालय बने भी हैं या नहीं, इसका खुलासा अब नए सिरे से होगा। कमिश्नर ने पंचायत राज विभाग से पिछले चार सालों में जरूरतमंद ग्रामीणों के घरों में बनवाए गए शौचालयों की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने सभी शौचालयों का स्थलीय सत्यापन करके उनके निर्माण की स्थिति की रिपोर्ट अगले 15 दिन में मांगी है। माना जा रहा है कि जांच में गड़बड़ी मिलने पर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो सकती है।
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कमिश्नर प्रमांशु से जांच के आदेश के बाद सीडीओ शिवसहाय अवस्थी ने डीपीआरओ से चार सालों में बनाए गए सभी शौचालयों का रिकार्ड तलब किया है। इसके बाद जिले के अफसरों को लगाकर इन शौचालयों का सत्यापन कराया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2012-13, 13-14, 14-15 और 15-16 में जिले के लोहिया समग्र गांवों में लगभग 20 हजार से ज्यादा शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य जिले को मिला था। इन चार सालों में लोहिया समग्र ग्राम योजना में चयनित 122 गांवों में लगभग 20 हजार शौचालयों के निर्माण का दावा पंचायत राज विभाग की ओर से किया जा चुका है। कमिश्नर ने प्रत्येक शौचालय का स्थलीय सत्यापन हर हाल में करने का आदेश दिया है। उन्होंने सत्यापन के लिए एक फार्मेट भी उपलब्ध कराया है, जिसमें प्रत्येक शौचालय की छत, टाइल्स, चैंबर, दीवार, कुंडी तक की स्थिति का जिक्र रिपोर्ट में करना पड़ेगा। कमिश्नर ने आदेश में कहा है कि शौचालयों का निर्माण केंद्र और प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में शामिल है इसलिए सत्यापन को गंभीरता से कराया जाए।

इंसेट...
सत्यापन में लगेंगे 44 विभागों के तीन सौ अफसर
शौचालयों के स्थलीय सत्यापन के लिए जिले के 44 विभागों के दो सौ से ज्यादा अफसरों को लगाया जाएगा। इसके लिए सीडीओ ने सिंचाई, जल निगम, आरईएस, पीडब्लूडी, बेसिक शिक्षा, सहकारिता, बिजली आदि विभागों के फील्ड अफसरों के नाम की सूची मांगी है। इनको सत्यापन के लिए गांवों का आवंटन कर दिया जाएगा। यह अफसर सत्यापन में मनमानी भी नहीं कर पाएंगे। वजह यह है कि क्रास चेकिंग के लिए एक-एक अफसर को लगाया जाएगा। इसके अलावा बीडीओ से अलग स्थलीय सत्यापन कराएंगे। जरूरत पड़ी तो जिला स्तरीय अफसरों से तीसरी बार सत्यापन कराया जाएगा।
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पहले भी सामने आ चुकी है गड़बड़ी
निर्मल भारत योजना में जिले में बनाए गए शौचालयों का सत्यापन साल 2014-15 में भी कराया गया था। इसमें 2012-13 और 13-14 तथा 14-15 में बनाए गए शौचालयों में अनियमितताएं सामने आई थीं। कई गांवों में तो शौचालयों का निर्माण ही नहीं पाया गया। कई घरों में शौचालयों के नाम पर सिर्फ दीवार बनाकर छोड़ दी गईं। इन शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य तत्कालीन डीपीआरओ टीसी पांडेय के समय में मिला था। उन्होंने बड़े अफसरों को जो रिपोर्ट उपलब्ध कराई गईं। उनमें और मौके पर अंतर पाया गया।
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