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हमें लोकतंत्र की कद्र नहीं

Sun, 24 Jan 2016 01:07 AM IST
बरेली
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आजादी हमको बहुत मेहनत और संघर्ष से मिली है, मगर लोकतंत्र थाली में परोसा हुआ मिल गया। यही वजह है कि हम उसकी कद्र नहीं कर पा रहे हैं। जरूरत है निजाम बजदलने की। आज भी हम 1860 के कानून में जी रहे हैं। जो अंग्रेजों ने दुनिया पर राज करने के लिए बनाया था। उसे वह खुद छोड़ चुके हैं मगर हम उसे ही पकड़े बैठे हैं। यह लाठीचार्ज आदि उसी का हिस्सा है। यह बात थियेटर के जाने माने कलाकार अश्वत भट्ट ने प्रेसवार्ता में कही। वह बरेली थियेटर फेस्ट में दिल्ली से आए हैं।
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आतंकवाद पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि राक्षस राम राज में भी थे और आज भी हैं। अच्छाई बुराई हमेशा साथ चलती हैं। आतंकवाद को अगर खत्म करना है तो बारूद बनाना बंद करें। हम खुद ही हथियार बनाते हैं फिर मार्केट तैयार करते हैं। इसके अलावा उन्होंने थियेटर पर भी चर्चा की। बोले, थियेटर एक संस्कार है, कारोबार नहीं। इस देश में थियेटर व्यावसायिक नहीं हुआ है। थियेटर में काम करने वाले भले ही व्यावसायिक हो रहे हैं, मगर अभिनय के सहारे जी नहीं सकते। वह अपने बारे में बताते हैं कि सोचा नहीं था फिल्म में काम करेंगे। मिल गई तो ठीक है। उनका यह भी कहना है कि आप में टैलेंट है और कुछ अच्छा करते रहेंगे तो लोग खुद आपके पास आएंगे।   

फिल्म: अश्वत भट्ट अब तक हैदर, फैटम, लम्हा, गैंगस्टर जैसी फिल्मों में काम कर चुके हैं। फिल्म टाइगर जल्दी ही आने वाली है। इसके अलावा कुछ और भी फिल्में हैं। 
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