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नशे में था कुंवारा, कर दी नसबंदी

Fri, 29 Jul 2016 12:54 AM IST
गजेंद्र सिंह
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शहर में एक कुं वारे लड़के की उस समय नसबंदी कर दी गई जब वह शराब के नशे में बेहोश थे। ये मामला तो पुलिस तक पहुंच चुका है लेकिन अभी ऐसे ही दो और मामले भी बताए जा रहे हैं जिनकी  रिपोर्ट नहीं हुई है। नसबंदी के आंकड़े बढ़ाने के लिए यह खेल एनजीओ ने खेला। पीड़ित युवक ने बारादरी थाने में एफआईआर दर्ज करवाई तो नसबंदी कराने के लिए प्रेरित करने वाले व्यक्ति को पुलिस ने गिरफ्तार तो किया लेकिन फिर थाने से ही छोड़ भी दिया। नसबंदी करने वाला एनजीओ भी संदेह के घेरे में है। 
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बारादरी थाना क्षेत्र का एक युवक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत है। लड़के का नाम न छापने की शर्त पर उसकी मां ने बताया कि उसने एक दिन दो पड़ोसियों के साथ बैठ कर काफी शराब पी ली। उसे होश नहीं था, शराब पिलाने वाला रोहित उसे नसबंदी करने वाली संस्था के क्लीनिक पर ले गया। यहां उसकी नसबंदी कर दी गई। एक दिन बाद उसको जब इसकी जानकारी हुई। उसने वकील के माध्यम से बारादरी थाने में 22 जुलाई को रोहित के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। युवक की मां का कहना है कि रोहित दो अन्य कुंवारे लड़काें की नसबंदी भी करा चुका है। लेकिन वे दोनों सामने नहीं आ रहे हैं इसलिए तहरीर में उनके नाम नहीं दिए गए हैं। उन्हाेंने अभी सीएमओ कार्यालय में शिकायत दर्ज नहीं कराई है लेकिन पुलिस अपने स्तर से मामले की जांच कर रही है। 
कहीं आंकड़े बढ़ाने को तो नहीं हो रहा खेल 
जिले में इस साल नसबंदी में पिछले साल के मुकाबले आधे केस भी नहीं हुए। इससे नसबंदी कराने के काम में लगी संस्था भी सवालाें के घेरे में हैं। पिछले साल जिले में 533 पुरुषों और 975 महिलाओं की नसबंदी हुई थी। लेकिन इस बार यह संख्या मात्र 47 और 742 है। 
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नसबंदी कराने वाले को मिलते हैं रुपये
नसबंदी के लिए पुरुषों को लाने वालों को एनजीओ एक हजार रुपये तक देता है। हालांकि यह कागजों में दर्ज नहीं होता है। आशा और एएनएम जिन्हें नसबंदी के लिए लाते हैं उन्हें सरकार की ओर से 400 से 600 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती है। माना जा रहा है कि इन्हीं रुपयों के लालच में रोहित नसबंदी रैकेट से जुड़ गया। 
 
ठीक हो जाएगा युवक
धोखे से नसबंदी कराने वाले युवक के परिवार द्वारा कार्रवाई किए जाने के बाद संस्था ने भरोसा दिलाया है कि वह फिर से ठीक हो जाएगा।  बताया गया है कि 15 दिन बाद उसकी नसबंदी खोल दी जाएगी। 
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वर्जन--
शासन ने पहले ही आशंका जताई थी कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार पुरुष नसबंदी कम कैसे हुई। यह मामला वाकई गंभीर है। इसकी जांच कराई जाएगी। 
-डॉ. सुबोध शर्मा, जेडी हेल्थ 
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