हड़ताल के दूसरे दिन भी जोरदार प्रदर्शन, बोले- पूंजीपतियों की झोली में जनता का पैसा डालने के लिए किया जा रहा है निजीकरण
घर-घर जाकर लोगों को बताएंगे, उनके साथ कैसा धोखा कर रही है सरकार
बरेली। बैंकों के निजीकरण के खिलाफ बैंक कर्मियों की दो दिवसीय हड़ताल के दूसरे दिन शुक्रवार को भी बैंकों पर ताले लटके रहे। बैंक कर्मियों ने कचहरी रोड पर एसबीआई शाखा परिसर में जोरदार प्रदर्शन कर चेतावनी दी कि सरकार जनता का पैसा पूंजीपतियों के हवाले करने से बाज आए और उन्हें किसानों जैसा आंदोलन चलाने को मजबूर न करे। उन्होंने कहा कि सरकार न मानी तो वे घर-घर जाकर लोगों को बताएंगे कि उनके साथ किस तरह का धोखा किया जा रहा है।
हड़ताल के दूसरे दिन यूनाइटेड फ ोरम आफ बैंक यूनियंस के बैनर तले प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन में शामिल कर्मचारी ‘बैंक बचाओ, देश बचाओ’, ‘बैंक नहीं बिकने देंगे’ जैसे नारे लिखे बैनर और पोस्टर लेकर पहुंचे थे। ट्रेड यूनियन फेडरेशन के महामंत्री संजीव मेहरोत्रा ने कहा कि यदि सरकार न चेती तो हम लंबी लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियां जनविरोधी बताते हुए कहा कि निजी बैंक काफी ज्यादा अतिरिक्त चार्ज ले रही हैं। राष्टीयकृत बैंक बहुत कम चार्ज लेती हैं। यह समझने की जरूरत है कि गरीब जनता किस तरह पूंजी जोड़ पाती है और सरकारी बैंक बंद होंगे तो उन पर कितना असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकारी बैंकों ने 50 करोड़ जनधन खाते खोले। निजी बैंकों ने मात्र 1.26 करोड़ खाते खोले। शिक्षा ऋ ण में सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी 95 फ ीसदी है। इसलिए बैंक का निजीकरण किसी तरह जनता के हित में नहीं है।
स्टेट बैंक स्टाफ एसोसिएशन के नवींद्र कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार पूंजीपतियों के हित साधने के लिए बैंकों को निजी हाथों में देने की तैयारी कर रही है। यह जनविरोधी और कर्मचारी विरोधी कदम है। सरकार ने कुछ वर्षों में निजी क्षेत्र का लगभग दो लाख अस्सी हजार करोड़ का ऋ ण माफ कर दिया है। साफ है कि जनता का धन निजी क्षेत्र को अंधाधुंध तरीके से बांटा जा रहा है। इसमें और तेजी लाने के लिए सरकारी बैंकों को कॉरपोरेट को देने की तैयारी की जा रही है।
अधिकारी संघ के पुनीत टंडन ने कहा कि किसानों को मिली हाल की जीत ने नया जोश पैदा किया है। जनता के हितों की लड़ाई हम जनता के साथ मिलकर लड़ेंगे। अधिकारी संघ के ओपी वडेरा ने कहा कि दो दिन की हड़ताल पूरी तरह सफ ल रही है। सरकार नहीं मानी तो हम अगले आंदोलन को भी तैयार हैं। कार्यक्रम का संचालन कर रहे दिनेश सक्सेना ने निजी बैंकों और राष्ट्रीयकृत बैंकों के बीच का अंतर समझाया। आयकर के जोनल सचिव रविंद्र सिंह, बरेली कॉलेज के जितेंद्र मिश्रा, बीमा कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अरविंद देव सेवक, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के फैसल ने भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर हड़ताल को समर्थन दिया। इस मौके पर सतीश शर्मा, आरबी खन्ना, अरविंद आनंद, आलोक गुप्ता, मुनीश बाबू, रश्मि शर्मा, अवधेश कुमार, नवीन श्रीवास्तव, शैलेंद्र कश्यप, संजीव अग्रवाल, संतोष तिवारी, प्रवेश कुमार, पीके माहेश्वरी, विशाल अवस्थी समेत अन्य कई नेताओं ने धरना प्रदर्शन को संबोधित किया।
यह आंदोलन सरकारी बैंकों को पूंजीपतियों से बचाने का
पिछले 10 सालों में बैंक कर्मियों की यह 43वीं हड़ताल है। हम लोग न अपने वेतन की बात कर रहे हैं न सुविधाओं की। हम देश की संस्थाओं को पूंजीपतियों से बचाने की एकमात्र मांग कर रहे हैं। सरकारी बैंक की पहुंच आम गरीब लोगों तक है, ये सामाजिक दायित्व के तहत चल रहे हैं। इन्हें पूंजीपतियों के हाथ में न बेचा जाए। - शिखा
हड़ताल पूरी तरफ सफ ल रही है। हम लोगों को दूसरे संगठनों का भी भारी समर्थन मिला है। हम बैंकों को बचाने के लिए लगातार संघर्ष करेंगे। हम देश के साथ और लोगों के साथ धोखा नहीं होने देंगे। यदि सरकार ने हमारी मांगे नहीं मानी और जरूरत पड़ी तो हम लोगों को घर-घर जाकर बताएंगे कि उनके साथ किस तरह धोखा हो रहा है। - गुंजन
जनता ने सरकारी बैंकों में 157 लाख करोड़ रुपये जमा किए हैं। इस पर पूंजीपतियों की नजर है। निजीकरण हुआ तो 1969 जैसे हालात होंगे जब एक इंडस्ट्री को लोन दिया जाता था और बैंक डूब जाते थे। देश में बहुत सारे प्राइवेट बैंक खुले और बंद हो गए लेकिन सरकारी बैंकों ने भरोसे को बनाकर रखा। जनता ने हम पर भरोसा किया है, हम ये भरोसा नहीं तोड़ेंगे। - निधि मिश्रा
सरकार ने दो बैंकों के निजीकरण की बात की है लेकिन वो दो बैंक कौन से हैं, यह किसी को नहीं पता। वे हमारे बैंक भी हो सकती है। 1969 में जब निजीकरण हुआ था, वो यूहीं नहीं हुआ था उसके लिए बैंकर ने बहुत लंबी लड़ाई लड़ी थी। पहले 27 बैंक थे जो मर्जर के बाद अब सिर्फ 12 बचे हैं। अब उन बैंकों का भी निजीकरण किया जा रहा है। - अपूर्वा श्रीवास्तव
500 करोड़ का लेनदेन प्रभावित, ग्राहक भटके
बरेली। बैंकों की दो दिन की हड़ताल से करीब पांच सौ करोड़ का लेनदेन प्रभावित होने का अनुमान है। बैंकों में आए ग्राहकों को भी इस बीच परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि किसी एटीएम पर पैसों की किल्लत नहीं हुई।
ट्रेड यूनियन फेडरेशन के महामंत्री संजीव मेहरोत्रा ने बताया कि दो दिन की हड़ताल से करीब पांच सौ करोड़ का लेनदेन प्रभावित हुआ है। हालांकि इस बीच किसी भी एटीएम पर पैसों की दिक्कत नहीं होने दी गई। न किसी एटीएम को बंद किया गया। धरनास्थल पर भी दो एटीएम थे जो लगातार चल रहे थे। धरना स्थल पर भी कई ग्राहक आए और एटीएम से पैसे निकालकर ले गए।
हड़ताल ने किया परेशान
मैं एक मोबाइल कंपनी में कार्यरत हूं। चेक क्लियर कराना था लेकिन दो दिन की हड़ताल के कारण नहीं करा सका। अब शनिवार को बैंक जाऊंगा। - गौरव कुमार, पीलीभीत बाईपास रोड
मुझे बैंकों में हड़ताल होने की जानकारी नहीं थी। बैंक पहुंची तो वहां लगे बैनर देखकर पता लगा कि हड़ताल है। खाली हाथ वापस लौट आई। -मीनाक्षी, चौधरी तालाब
एक निजी कंपनी में कार्यरत हूं। अक्सर बैंकों में चेक से संबंधित काम रहते हैं। दो दिन से कोई काम नहीं हो पाया है। -ऋतिक, बिहारीपुर
बैंक में बचत खाता चल रहा है जिसे मोबाइल नंबर जुड़वाना था। बैंकों की हड़ताल की जानकारी नहीं थी इसलिए बैंक आकर खाली लौटना पड़ा। - सिंधु सुता, कर्मचारी नगर